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Maa Bagalamukhi Prakatyotsav: मां बगलामुखी प्राकट्योत्सव आज, करें मां की उपासना, जीवन की हर बाधा होगी दूर, जानें महत्व, कथा और उपाय

Maa Bagalamukhi Prakatyotsav

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Maa Bagalamukhi Prakatyotsav: धर्म डेस्क: सनातन परंपरा में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। उन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनका स्वरूप पीले वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित माना जाता है। मान्यता है कि उनकी उपासना से शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति निष्क्रिय हो जाती है। यही वजह है कि न्याय, विजय और सुरक्षा की कामना करने वाले भक्त विशेष रूप से उनकी आराधना करते हैं।


पौराणिक कथा: जब सृष्टि पर आया संकट

कथाओं के अनुसार सतयुग में एक भयंकर तूफान ने पृथ्वी के अस्तित्व को संकट में डाल दिया था। तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव की शरण ली। शिव ने बताया कि इस संकट से केवल आदिशक्ति ही रक्षा कर सकती हैं। इसके बाद विष्णु जी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी हरिद्रा झील से बगलामुखी रूप में प्रकट हुईं और सृष्टि को विनाश से बचाया।


मंत्रों का प्रभाव और साधना का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में मां बगलामुखी के मंत्रों को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। “ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै नमः” और “ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां…” जैसे मंत्रों के जप से शत्रु बाधा दूर होती है, वाणी में प्रभाव आता है और मानसिक शक्ति मजबूत होती है। इसलिए तंत्र साधना में भी इनकी विशेष भूमिका मानी जाती है।


आज मनाई जा रही है बगलामुखी जयंती

बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा, जप और हवन का फल कई गुना बढ़ जाता है। खासतौर पर शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जाता है।


पूजा विधि और जरूरी सावधानियां

इस दिन सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें। मां को पीले फूल, फल और हल्दी अर्पित करें। हालांकि, मां बगलामुखी की साधना तांत्रिक मानी जाती है, इसलिए इसे बिना गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करना चाहिए। पूजा का उद्देश्य हमेशा सकारात्मक होना चाहिए और किसी के अहित की भावना से बचना चाहिए।


जयंती पर करें ये सरल उपाय

मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा में पीले रंग का अधिक उपयोग करें। पीले सरसों से हवन करना, चने की दाल अर्पित कर दान देना और पीली मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन उपायों से मां बगलामुखी अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद देती हैं।

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