UP विधानसभा में महिला आरक्षण पर गरमागरम बहस, विशेष सत्र में पक्ष-विपक्ष ने चलाए शब्दों के तीर
UP : लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण बिल को लेकर विशेष सत्र बुलाया गया। इस दौरान सदन में जोरदार बहस हुई और पक्ष-विपक्ष ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। भाजपा विधायकों ने कांग्रेस और सपा पर महिला आरक्षण को रोकने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने भाजपा पर महिलाओं की गरिमा मर्दन करने का आरोप लगाया।
UP : BJP का विपक्ष पर तीखा प्रहार
मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि आज हम महिला आरक्षण पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं ताकि पूरे प्रदेश की जनता को यह पता चले कि विपक्ष ने इस अधिनियम को लागू होने से रोकने के लिए क्या-क्या अड़ंगे लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1947 से लगातार इस बिल को किसी न किसी बहाने से रोकती रही है। बीजेपी विधायक विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि 17 तारीख का दिन आधी आबादी के लिए काला दिन साबित हुआ, जब विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने का काम किया। मंत्री संजय निषाद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं का आरक्षण भीख नहीं, उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि मुगलों के समय महिलाओं ने तलवार उठाई थी, जबकि कुछ लोग सलवार पहनकर बैठ गए थे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हो चुका है, लेकिन अभी भी संसद में केवल 15% महिलाएं हैं। हमें 2034 तक इंतजार नहीं करना चाहिए।
UP : विपक्ष का पलटवार
सपा विधायक आर.के. वर्मा ने कहा कि भाजपा का लंबा इतिहास रहा है नारी गरिमा को मर्दन करने का। पूरे देश में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। सपा विधायक रागिनी सोनकर ने कहा कि भाजपा संसद में नेहरू को और विधानसभा में नेताजी को कोसती है, लेकिन प्रदेश में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यूपी विधानसभा में 50% आरक्षण दिया जाए। कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने कहा कि इतिहास सबसे बड़ा गवाह है। उन्होंने आजादी से पहले कांग्रेस की भूमिका पर तथ्य रखे।
UP : विशेष सत्र का मकसद
यह विशेष सत्र केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण अधिनियम के समर्थन में प्रस्ताव पास करने और विपक्ष के रवैये को उजागर करने के लिए बुलाया गया था। सदन में महिला सशक्तिकरण पर लंबी चर्चा हुई, जिसमें दोनों तरफ से तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

