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गोवर्धन पूजा और भाई दूज 2024: जानें पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व
नई दिल्ली। दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव के बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 2 नवंबर और भाई दूज 3 नवंबर को मनाई जाएगी। इन दोनों पर्वों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जो विशेष रूप से भाई-बहन के संबंधों को और भी गहरा बनाते हैं। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा और भाई दूज के बारे में पूरी जानकारी।
गोवर्धन पूजा: 2 नवंबर 2024
इस वर्ष गोवर्धन पूजा 2 नवंबर को मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि को मनाने का विधान है, जो इस वर्ष 1 नवंबर को शाम 6:16 बजे शुरू होकर 2 नवंबर को रात 8:21 बजे समाप्त होगी। गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6:34 बजे से 8:46 बजे तक रहेगा, जबकि सायंकालीन मुहूर्त दोपहर 3:23 बजे से शाम 5:35 बजे तक रहेगा।
महत्व: पुराणों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के घमंड को तोड़ने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया था। इस अद्भुत लीला की स्मृति में गोवर्धन पूजा का आयोजन होता है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाकर प्रसन्न किया जाता है। इस दिन 56 भोग चढ़ाकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।


भाई दूज: 3 नवंबर 2024
दीपावली के पांच दिवसीय पर्व के अंतिम दिन भाई दूज का आयोजन होता है। इस बार भाई दूज 3 नवंबर को मनाई जाएगी। भाई दूज का शुभ मुहूर्त द्वितीया तिथि में होता है, जो 2 नवंबर को रात 8:21 बजे से शुरू होकर 3 नवंबर को रात 10:05 बजे तक रहेगा।
महत्व: भाई दूज का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे, जिन्होंने उनका स्वागत करते हुए उनके लिए भोजन तैयार किया। इसके अलावा, भविष्य पुराण के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुनाजी के घर भोजन करने गए थे। इसी कारण इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है, जहां बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं।
भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक कर, उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। इस पर्व को भाऊ बीज, भात्र द्वितीया, और यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इन दोनों पर्वों का न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक महत्व भी है, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

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