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एमपी में अफसरों पर सियासत सीएम बोले- रस्सी जल गई पर बल नहीं गया
भोपाल। प्रदेश के सियासी केंद्र में एक बार फिर अफसर और कर्मचारी आ गए हैं। नौकरशाही में लेन-देन कर तैनाती किए जाने के कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बयान पर जुबानी तीर चलने लगे। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जहां अफसर-कर्मचारियों के लिए ढाल बनकर खड़े हो गए, वहीं आइएएस एसोसिएशन ने भी दो टूक कह दिया कि राजनीतिक दल अफसर-कर्मचारियों पर ऐसी टिप्पणी न करें। सीएम ने प्रदेश अध्यक्ष पटवारी समेत पूरी कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं गया। पिछले 20 सालों से कांग्रेस प्रदेश में सत्ता से बाहर है। बीच में कुछ समय मिला, पर सरकार नहीं चला सकी। और अब भी जिस तरीके से अफसर और कर्मचारियों के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने जो भाषा नर्मदापुरम् में इस्तेमाल की, वह सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का अपमान है। इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों का अपमान उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी निष्ठा और शिद्दत से काम कर रहे हैं। वे राज्य सरकार सभी अफसर और कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।
पटवारी के इस बयान से बवाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को इटारसी में कहा था, नौ माह की सरकार में मप्र कर्ज, करप्शन और क्राइम का प्रदेश बन गया है। कलेक्टर-एसपी हो या पटवारी सभी की पोस्टिंग बिना रुपए के लेन-देन से नहीं होती है। वल्लभ भवन और मप्र भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। साथ ही कहा था कि खनिज, शराब, प्रशासनिक माफिया हर तरह का माफिया सरकार पर हावी है।
जवाब... योग्यता से होती है तैनाती
सियासी बवाल के बीच आइएएस एसोसिएशन ने एंट्री की। एसोसिएशन सचिव विवेक पोरवाल ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों से सरकार ने जब-जब परिणाम की अपेक्षा की, तब-तब उन्होंने पूरे समर्पण से जनता तक सरकार की सेवाएं पहुंचाईं। सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों की पदस्थापना योग्यता और पद की आवश्यकताओं के अनुसार होती है। एसोसिएशन ने राजनीतिक दलों से अनुरोध किया कि अफसरों के लिए ऐसी टिप्पणियां न करें, जिससे अफसरों का मनोबल टूटे और वे कर्तव्यों को ठीक से अंजाम न दे सके।
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