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Bahubali CMS-03 satellite launched : इसरो ने ‘बाहुबली’ CMS-03 सैटेलाइट किया लॉन्च, भारत की नजर अंतरिक्ष में; जानिए इसकी क्षमताएं

Bahubali CMS-03 satellite launched

Bahubali CMS-03 satellite launched : नई दिल्ली।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इसरो ने रविवार को अपने अब तक के सबसे भारी उपग्रह सीएमएस-03 (CMS-03) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। इस सैटेलाइट को एलवीएम3-एम5 रॉकेट के ज़रिए लॉन्च किया गया, जिसे उसकी विशाल भार वहन क्षमता के कारण ‘बाहुबली रॉकेट’ नाम दिया गया है। यह मिशन इसरो के लिए एक और बड़ी सफलता साबित हुआ है, जिसने भारत की अंतरिक्ष तकनीक को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।


Bahubali CMS-03 satellite launched : इसरो के वैज्ञानिकों के मुताबिक, सीएमएस-03 उपग्रह का वजन 4,410 किलोग्राम है, जो अब तक भारत से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में छोड़ा गया सबसे भारी उपग्रह है। यह सैटेलाइट 43.5 मीटर लंबाई वाले बाहुबली रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ। लॉन्चिंग का समय सुबह 5 बजकर 26 मिनट निर्धारित किया गया था, और मिशन पूरी तरह सफल रहा।


Bahubali CMS-03 satellite launched : ‘बाहुबली रॉकेट’ यानी एलवीएम3, अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन के जरिए 8,000 किलोग्राम तक का भार पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) और 4,000 किलोग्राम तक का भार GTO तक पहुंचाने में सक्षम है। यही कारण है कि इसे भारत का सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद प्रक्षेपण यान कहा जाता है।


Bahubali CMS-03 satellite launched : इस रॉकेट ने इससे पहले भारत के गर्व चंद्रयान-3 मिशन को भी सफलता के साथ लॉन्च किया था, जिसके जरिए भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर इतिहास रचा था। इस बार, इसी रॉकेट ने भारत के संचार और निगरानी नेटवर्क को और मजबूत करने के उद्देश्य से CMS-03 सैटेलाइट को लॉन्च किया है।


Bahubali CMS-03 satellite launched : इसरो ने जानकारी दी कि यह मिशन भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV Mk3) की पांचवीं अभियानगत उड़ान है। इसमें दो ठोस मोटर स्ट्रैप-ऑन (S200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (L110) और एक शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण (C25) शामिल हैं। इन सभी चरणों की संयुक्त क्षमता इसरो को भारी संचार उपग्रहों को अपने दम पर प्रक्षेपित करने की पूर्ण आत्मनिर्भरता देती है।


Bahubali CMS-03 satellite launched : CMS-03 सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य भारत के विस्तृत भूभाग और समुद्री क्षेत्रों में बहु-बैंड संचार सेवाएं प्रदान करना है। हालांकि आधिकारिक रूप से इसरो ने यह नहीं कहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह सैटेलाइट भारत की सैन्य निगरानी क्षमताओं को भी सशक्त कर सकता है, जिससे देश की सुरक्षा प्रणाली और भी मजबूत होगी।

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