भोपाल में रानी दुर्गावती नर्सिंग कॉलेज का पता लगाने वाले को 1 लाख का इनाम देगी NSUI
भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग महाघोटाला नए-नए खुलासों के साथ गंभीर होता जा रहा है। NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने शुक्रवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में नर्सिंग कॉलेजों में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर गंभीर आरोप लगाएं। परमार ने कहा कि 2023 में उच्च न्यायालय के आदेश पर शुरू हुई सीबीआई जांच की पहली रिपोर्ट में गड़बड़ियां उजागर हुई थीं, अब सीबीआई की दूसरी रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रवि परमार ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 667 नर्सिंग कॉलेजों में से 309 को डेफिसिएंट (अपर्याप्त) कैटेगरी में रखा गया है। यह आंकड़ा पहली रिपोर्ट की तुलना में चार गुना ज्यादा है। पहली रिपोर्ट में सूटेबल माने गए कई कॉलेज अब डेफिसिएंट पाए गए हैं, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
रवि परमार ने आरोप लगाया कि नर्सिंग काउंसिल में भ्रष्टाचार का स्तर इतना बढ़ चुका है कि सीबीआई द्वारा डेफिसिएंट घोषित किए गए नर्सिंग कॉलेजों को ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल (नई दिल्ली) ने 2024-25 सत्र के लिए मान्यता जारी कर दी। यह साबित करता है कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल और नर्सिंग कॉलेज संचालकों की गहरी मिलीभगत से भ्रष्टाचार हो रहा है। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने शासकीय रानी दुर्गावती नर्सिंग नियर हाईकोर्ट भोपाल को ढूंढ कर लाने वालों 1 लाख रुपए का ईनाम देने की घोषणा की जोकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट पर 21 नवंबर 2024 को अपलोड मान्यता लिस्ट में शामिल हैं।
भोपाल के IES और मार बेसिलस नर्सिंग कॉलेज और प्रदेश के एक दर्जन नर्सिंग कॉलेज की इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा दी गई मान्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सीबीआई की डेफिसिएंट लिस्ट में उनको काउंसिल ने किस आधार पर मान्यता जारी की गई। परमार ने कहा कि "यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कैसे फर्जी मान्यताएं देकर छात्रों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।" परमार ने बताया कि 2005 से फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं जिनके ऊपर शासन प्रशासन ने ध्यान तक नहीं दिया। फर्जी नर्सिंग कॉलेज इतने सालों में लाखों छात्र छात्राओं को रजिस्ट्रेशन (डिग्री) बांट चुके उनकी भी जांच होना चाहिए।
पहली और दूसरी रिपोर्ट का तुलनात्मक विश्लेषण
सीबीआई की पहली रिपोर्ट (फरवरी 2024):
सूटेबल (पात्र): 169 कॉलेज डेफिसिएंट
(अपर्याप्त): 73 कॉलेज
अनसूटेबल (अयोग्य): 66 कॉलेज
सीबीआई की दूसरी रिपोर्ट (नवंबर 2024):
डेफिसिएंट (अपर्याप्त): 309 कॉलेज
रवि परमार की शिकायत और हाईकोर्ट का आदेश
परमार ने बताया कि उन्होंने 15 अप्रैल 2024 को सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कई सूटेबल माने गए नर्सिंग कॉलेजों की संदिग्ध मान्यता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद दिल्ली सीबीआई ने जांच तेज की और कई अधिकारियों व दलालों को गिरफ्तार किया। हाईकोर्ट ने सभी 169 सूटेबल और अन्य नर्सिंग कॉलेजों के पुनः निरीक्षण का आदेश दिया।


