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MP News : जबलपुर आयुध निर्माणी फैक्ट्री में CBI का छापा, DGM दीपक लांबा से हुई पूछताछ, दस्तावेज व अन्य सामान जब्त
MP News : जबलपुर। आयुध निर्माणी फैक्ट्री, जबलपुर (पूर्व में ग्रे आयरन फाउंड्री - जीआईएफ के नाम से जानी जाती थी) में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। इस दौरान नागपुर से स्थानांतरित होकर आए डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) दीपक लांबा से सीबीआई ने गहन पूछताछ की। दीपक लांबा पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप है।
नागपुर में टेंडर घोटाले का आरोप
सीबीआई की यह कार्रवाई नागपुर की अंबाझरी आयुध निर्माणी फैक्ट्री में दीपक लांबा के डीजीएम के कार्यकाल के दौरान हुए कथित टेंडर घोटाले की शिकायत के आधार पर की गई। आरोप है कि लांबा ने अपने चचेरे भाई मोहित ठोलिया की कंपनी, ऑटोमेशन इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज, को 1.71 करोड़ रुपये का टेंडर दिलाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया। शिकायत के अनुसार, लांबा ने टेंडर की शर्तों में हेरफेर कर और जाली अनुभव प्रमाण-पत्रों के आधार पर इस कंपनी को ठेका दिलवाया।
दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त
सीबीआई ने दीपक लांबा के जबलपुर स्थित कार्यालय, निवास और उनके परिजनों से जुड़े अन्य ठिकानों पर तलाशी ली। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि लांबा और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के माध्यम से मोहित ठोलिया की कंपनी के साथ कई संदिग्ध लेन-देन हुए। सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये लेन-देन लांबा के निजी हितों और कंपनी से उनके संबंधों की ओर इशारा करते हैं।
शिकायत और जांच की शुरुआत
यह मामला यंत्रा इंडिया लिमिटेड के उप मुख्य सतर्कता अधिकारी डी.के.टी. गुप्ता द्वारा 7 जुलाई 2025 को दर्ज की गई शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में कहा गया था कि लांबा ने अपने रिश्तेदार के नाम पर एक फर्जी कंपनी स्थापित की और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर उसका लाभ उठाया। इसके बाद 25 अगस्त सीबीआई ने लांबा, मोहित ठोलिया और उनकी कंपनी के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत मामला दर्ज किया।
अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
सीबीआई ने इस मामले में अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई है। शिकायत में तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का नाम भी शामिल है, जिनके खिलाफ जांच जारी है। लांबा को भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद नागपुर से जबलपुर स्थानांतरित किया गया था, लेकिन आरोप है कि उन्होंने वहां भी कर्मचारियों पर दबाव बनाकर अनुचित तरीके से टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।
सीबीआई की कार्रवाई जारी
सीबीआई की यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि इस मामले की पूरी गहराई तक पहुंचा जा सके।
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