Mohan Bhagwat : RSS कहेगा तो पद छोड़ दूंगा… संघ प्रमुख मोहन भागवत ने क्या कहा? उत्तराधिकार की अटकलों पर लगा विराम
Mohan Bhagwat : नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद अपने पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर साफ रुख सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में पद व्यक्तिगत इच्छा से नहीं, बल्कि संगठन की व्यवस्था और निर्णय से चलता है। अगर संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा तो वह बिना किसी हिचक के तुरंत ऐसा करेंगे।
Mohan Bhagwat : संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने बताया कि 75 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने स्वयं संघ को अपनी आयु और स्थिति से अवगत कराया था। आम धारणा है कि इस उम्र के बाद सक्रिय पद से हट जाना चाहिए, लेकिन संगठन ने उन्हें जिम्मेदारी निभाते रहने के लिए कहा।
Mohan Bhagwat : उन्होंने कहा कि सरसंघचालक का पद चुनाव से तय नहीं होता, बल्कि क्षेत्रीय और प्रांतीय पदाधिकारियों की सहमति से नियुक्ति की प्रक्रिया होती है। इस बयान से संघ के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों को काफी हद तक विराम मिल गया है।
Mohan Bhagwat : हल्के अंदाज़ में भागवत ने कहा कि संघ अपने स्वयंसेवकों से अंतिम क्षण तक कार्य लेता है और इतिहास में किसी को औपचारिक रूप से ‘रिटायर’ नहीं किया गया। उनका यह बयान संगठन की कार्यशैली और समर्पण की परंपरा को दर्शाता है।
Mohan Bhagwat : कार्यक्रम में भाषा के मुद्दे पर भी उन्होंने साफ कहा कि अंग्रेज़ी संघ की कार्यभाषा नहीं बन सकती, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहां आवश्यकता होती है, वहां अंग्रेज़ी का उपयोग किया जाता है और लोगों को उस पर अच्छी पकड़ भी होनी चाहिए। उनका कहना था कि अंग्रेज़ी सीखना या बोलना गलत नहीं, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को भूलना उचित नहीं है।
Mohan Bhagwat : भागवत ने संघ की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य प्रचार करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कार और चरित्र निर्माण करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि संघ स्वयं के प्रचार में पीछे रहा है, लेकिन अधिक प्रचार से प्रसिद्धि और फिर अहंकार पैदा हो सकता है, जिससे बचना जरूरी है।
Mohan Bhagwat : मोहन भागवत के इस बयान ने संगठन के नेतृत्व, कार्यशैली और विचारधारा तीनों मुद्दों पर स्पष्टता दी है। फिलहाल इतना तय है कि जब तक संघ चाहेगा, वह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।

