CG News : ऑर्थोपेडिक में नई क्रांति: फ्रैक्चर मरीज ऑपरेशन के दूसरे दिन से चलने लगे, रायपुर में जुटे देशभर के 500 विशेषज्ञ
CG News : रायपुर। रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन की सिल्वर जुबली कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन आधुनिक सर्जरी और नई तकनीकों ने इलाज की तस्वीर बदलने का दावा किया। देश-विदेश से पहुंचे ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने बताया कि अब उन्नत इम्प्लांट और सर्जिकल विधियों की मदद से कई फ्रैक्चर मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन चलने-फिरने लगते हैं, जिससे रिकवरी तेज और अस्पताल में रहने की अवधि कम हो गई है।
एसोसिएशन के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. अनिल वर्मा, सेक्रेटरी डॉ. सुशील शर्मा और को-चेयरमैन डॉ. अंकुर ने बताया कि 25 साल की उपलब्धियों को समर्पित इस कॉन्फ्रेंस में 500 से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। हैंड सर्जरी, स्पाइन, ट्रॉमा, आर्थोस्कोपी, ऑर्थोप्लास्टिक सहित सभी प्रमुख सब-स्पेशलिटीज पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए।
मुंबई से आए वरिष्ठ सर्जन डॉ. तन्ना ने कोहनी के फ्रैक्चर और रेडियल हेड रिप्लेसमेंट की नई तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले जहां लंबे समय तक हाथ स्थिर रखना पड़ता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक से मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
पुणे के संचेती हॉस्पिटल से आए डॉ. पटवर्धन ने बच्चों के हिप जॉइंट से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई और कहा कि समय पर इलाज से भविष्य की विकलांगता को रोका जा सकता है। नई सर्जिकल तकनीकों से बच्चों का हिप जॉइंट सुरक्षित रखा जा सकता है।

पूर्व आईओए अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर ने पैरों की हड्डी के फ्रैक्चर में नई नेलिंग तकनीकों को गेमचेंजर बताया, जबकि सूरत के डॉ. जिग्नेश पांडेय और डॉ. चेतन प्रधान ने घुटने और कलाई के जटिल फ्रैक्चर के आधुनिक और सुरक्षित समाधान प्रस्तुत किए।
कॉन्फ्रेंस में जॉइंट रिप्लेसमेंट को टालने पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सही समय पर इलाज, जीवनशैली में बदलाव और आधुनिक प्रक्रियाओं से कई मरीजों को बड़ी सर्जरी से बचाया जा सकता है।
पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए क्विज, पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन आयोजित किए गए, वहीं एसोसिएशन के 25 पूर्व अध्यक्षों को सम्मानित किया गया। कुल मिलाकर कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन आधुनिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा, अनुभव साझा करने और मरीजों को बेहतर भविष्य देने की दिशा में अहम साबित हुआ।

