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v2v technology in india: अब चिल्लाकर बोलेगी कार— 'रुकिए! आगे खतरा है', भारत में 2026 से शुरू होगी V2V Technology, जानें क्या है नितिन गडकरी का मिशन जीरो फर्टिलिटी

V2V technology in India: नई दिल्ली। कैसा होगा अगर आप की ड्राइव पर निकले और रास्ते में घना कोहरा है और आपको सामने कुछ नहीं दिख रहा, लेकिन आपकी कार अचानक चिल्लाकर कहे— "रुकिए!

V2V technology in India: नई दिल्ली। कैसा होगा अगर आप की ड्राइव पर निकले और रास्ते में घना कोहरा है और आपको सामने कुछ नहीं दिख रहा, लेकिन आपकी कार अचानक चिल्लाकर कहे— "रुकिए! आगे 100 मीटर पर एक ट्रक खड़ा है। तो चौंकियेगा मत, लेकिन अब ये हकीकत बनने जा रहा है। भारत सरकार 2026 के अंत तक देश में 'व्हीकल-टू-व्हीकल' (V2V) कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की अंतिम तैयारी में है।


V2V technology in India: बिना इंटरनेट के 'बात' करेंगी गाड़ियां


इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काम करने के लिए किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। आपकी गाड़ी में सिम कार्ड जैसी एक 'ऑन-बोर्ड यूनिट' (OBU) लगाई जाएगी। यह डिवाइस आसपास के वाहनों को उनकी स्पीड, लोकेशन और अचानक ब्रेक लगने जैसे सिग्नल भेजेगी। सर्दियों में जीरो विजिबिलिटी के दौरान यह सिस्टम ड्राइवर के लिए 'तीसरी आंख' बनेगा और चेन-रिएक्शन वाले हादसों को रोकेगा।


V2V technology in India: नितिन गडकरी का मिशन जीरो फर्टिलिटी


मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया कि यह सिस्टम 80% तक सड़क हादसों को कम कर सकता है। सरकार इस प्रोजेक्ट पर करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए मुफ्त स्पेक्ट्रम देने पर भी सहमति जताई है।


V2V technology in India: शुरुआत में यह डिवाइस नई गाड़ियों में अनिवार्य होगी, जिसके बाद पुरानी गाड़ियों में भी इसे लगवाने का विकल्प दिया जाएगा। वर्तमान में महंगी कारों में आने वाला ADAS केवल सेंसर्स पर निर्भर है। लेकिन V2V तकनीक इसके साथ मिलकर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र बनाएगी। इसकी अनुमानित लागत प्रति वाहन 5 से 7 हजार रुपए के बीच हो सकती है।

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