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Rajasthan News : अश्विनी बिश्नोई ने रचा इतिहास, वर्ल्ड रेसलिंग चौंपियनशिप अंडर-17 में गोल्ड मेडल, सीएम भजनलाल शर्मा ने दी बधाई
- Rohit banchhor
- 04 Aug, 2025
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने अश्विनी को इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Rajasthan News : जयपुर। राजस्थान के भीलवाड़ा की बेटी अश्विनी बिश्नोई ने एथेंस, ग्रीस में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चौंपियनशिप (अंडर-17) में 65 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अश्विनी ने अपने सभी पांच मुकाबलों में बिना एक भी अंक गंवाए शानदार प्रदर्शन किया और कजाकिस्तान की ख्यातनाम पहलवान को फाइनल में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने अश्विनी को इस ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अश्विनी की ऐतिहासिक जीत-
17 वर्षीय अश्विनी बिश्नोई ने एथेंस में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चौंपियनशिप (अंडर-17) में 65 किलो फ्रीस्टाइल वर्ग में अपने सभी मुकाबले बिना किसी अंक खोए जीते। उनके इस दमदार प्रदर्शन ने उन्हें राजस्थान की पहली महिला पहलवान बना दिया, जिसने इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर स्वर्ण पदक हासिल किया। अश्विनी ने इससे पहले वियतनाम में आयोजित सब-जूनियर एशियन रेसलिंग चौंपियनशिप 2025 में भी गोल्ड मेडल जीता था, जिसके साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी की।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने दी बधाई-
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में अपने सिविल लाइंस स्थित निवास पर अश्विनी से मुलाकात की और उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मुख्यमंत्री निवास पर वर्ल्ड रेसलिंग चौंपियनशिप (अंडर-17) में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को गौरवान्वित करने वाली भीलवाड़ा की बेटी अश्विनी बिश्नोई से स्नेहिल भेंट कर उन्हें इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।”
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने भी अश्विनी की प्रशंसा करते हुए कहा, “अश्विनी ने 65 किलो श्रेणी में बेमिसाल प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। वह न केवल राजस्थान की पहली महिला पहलवान बनीं, जिन्होंने वर्ल्ड चौंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि एक मजदूर परिवार से निकलकर विश्व पटल पर भारत का नाम रौशन करने वाली वे आज के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।”
अश्विनी का प्रेरणादायक सफर-
भीलवाड़ा के एक साधारण मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाली अश्विनी बिश्नोई ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उनके पिता, मुकेश बिश्नोई, एक कपड़ा दुकान में मजदूर के रूप में काम करते हैं, और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अश्विनी के प्रशिक्षण के लिए हर संभव प्रयास किया। कोच कल्याण सिंह के मार्गदर्शन में अश्विनी ने प्रतिदिन 8-9 घंटे अभ्यास किया और अब तक 14 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं।
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