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लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे शासकीय चिकित्सक, 20-21 को काली पट्टी, वही 23 फरवरी को होगी आधे घंटे की हड़ताल..

बैठक के दौरान चिकित्सकों की समस्याओं के निराकरण को लेकर आगमी आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।

लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे शासकीय चिकित्सक, 20-21 को काली पट्टी, वही 23 फरवरी को होगी आधे घंटे की हड़ताल..
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MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश के चिकित्सकों की समस्याओं के निदान लिए मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने उच्च स्तरीय समिति का गठन करने की मांग की है। साथ ही पूर्व की कैबिनेट में प्रदेश के 15 हज़ार चिकित्सकों के हित में हुए निर्णय के साथ ही तत्काल डीएसीपी लागू करने की गुहार लगाई है। दरअसल राजधानी भोपाल में मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के समस्त पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक के दौरान चिकित्सकों की समस्याओं के निराकरण को लेकर आगमी आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।

MP News : इस बैठक में शामिल हुए डॉ माधव हासानी ने सभी पदाधिकारियों की सहमति से आगमी 20 फरवरी से लंबित मांगों के निराकरण को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया। साथ ही डॉ माधव हासानी एवं डॉ राकेश मालवीय ने घोषणा की के प्रदेश के इलेजिबल चिकित्सकों को डीएसीपी लाभ नही मिल जाता तब तक वह भी डीएसीपी का लाभ नहीं लेंगे। डॉ राकेश मालवीय ने बताया कि 20-21 फरवरी को प्रदेश भर के चिकित्सक सभी शासकीय अस्पतालों में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और 23 फरवरी को दोपहर 12:00 से लेकर 12:30 बजे तक काम बंद हड़ताल करेंगे। अगर उसके बाद भी सरकार उनकी मांगों पर सहमति नहीं जताती है तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा।

MP News : 3 महीने पहले समाप्त हो चुकी है तय समय सीमा-
बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों ने पूर्व में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की थी। तब उच्च न्यायालय ने हड़ताल खत्म करने के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय में जब पूर्ण रूप से सुनवाई हुई तब न्यायालय द्वारा टोकन स्ट्राइक के साथ शासन स्तर पर कमेटी बनाने के निर्देश दिए गए थे। वो तीन महीने की तय सीमा समाप्त चुकी है। लेकिन अभी तक डीएसीपी नही बनाई गईं हैं। साथ ही समस्याओं के निराकरण के लिए अभी तक उच्च स्तरीय कमेटी का भी गठन नहीं हुआ है। डॉ माधव ने कहा कि पिछले कैबिनेट में जो निर्णय लिए गए थे उसका भी क्रियान्वित नहीं किया जा रहा है।

MP News : वहीं चिकित्सक संघ के डॉ राकेश मालवीया ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा जो निर्णय लिए गए थे उसको पूरा क्यों नहीं किया जा रहा हैं। सरकार उनके कामों में ब्यूरोक्रेसी को बढ़ावा क्यों दे रही है। यह बड़ा सवाल है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में बड़े स्तर पर नकली दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए संघ लगातार सरकार से मांग कर रहा है। लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अब भी सरकार नही सुनती है तो चिकित्सक 23 फरवरी को आधे घंटे के लिए सभी काम बंद कर हड़ताल करेंगे। इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेगी। साथ ही आंदोलन के बाद भी सरकार के कानो में जू नहीं रेंगती है तो आगे उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा


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