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Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: प्रयागराज मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया तीखा जवाब, जानें क्या बोले..

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: प्रयागराज मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिया तीखा जवाब, जानें क्या बोले..
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Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: लखनऊ: प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण द्वारा ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जारी नोटिस से विवाद और तेज हो गया है। मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 का हवाला देते हुए 24 घंटे में उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे स्वयं को शंकराचार्य क्यों बताते हैं। प्रशासन का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2022 में किसी भी नए पट्टाभिषेक पर रोक लगाई थी।

Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

इस नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आधी रात के बाद कानूनगो और अन्य अधिकारी उनके शिविर पहुंचे और नोटिस स्वीकार कराने का दबाव बनाया। नोटिस न लेने पर उसे शिविर के गेट पर चस्पा कर दिया गया, जिसे उन्होंने असामान्य और दुर्भावनापूर्ण बताया।

Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि प्रशासन ने न्यायालय के आदेशों का गलत हवाला दिया है। उनके अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को हो चुका था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का प्रतिबंध भविष्य के पट्टाभिषेक पर 17 अक्टूबर 2022 के बाद लागू हुआ। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में भी कई स्थानों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य कहा गया है और ऐसे में नोटिस अवमानना की श्रेणी में आता है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि द्वारका और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें मान्यता देते हैं और पिछले माघ मेले में उनके साथ स्नान भी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शंकराचार्य कौन है, यह तय करने का अधिकार प्रशासन या सरकार को कैसे हो सकता है। इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटना की निंदा करते हुए इसे संतों के अपमान का मामला बताया। फिलहाल विवाद सुलझता नजर नहीं आ रहा है और सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर टिकी हैं।

Controversy over the Shankaracharya in Magh Mela: माघ मेला विवाद की पूरी कहानी

प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद के दावेदार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच गहरा टकराव हो गया है। विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या (19 जनवरी) को हुई, जब स्वामी अपने शिष्यों के साथ पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। इस दौरान प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की हुई, उनका छत्र टूट गया और शिष्यों ने मारपीट का आरोप लगाया। नाराज स्वामी ने अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठ गए। मामला बढ़ा तो मंगलवार देर रात मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस थमाया, जिसमें 24 घंटे में शंकराचार्य पद के दावे का स्पष्टीकरण मांगा गया। स्वामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नोटिस को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया और जवाब दिया।


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