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सूर्य के रहस्य से उठेगा पर्दा, ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया प्रोबा-3 मिशन, होगी सूरज की स्टडी

ISRO द्वारा 5 दिसंबर 2024 को प्रोबा-3 मिशन का सफलतापूर्वक लॉन्च, जिसमें दो सैटेलाइट्स कोरोनाग्राफ और ऑक्लटर को PSLV-XL रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा गया। यह मिशन सूरज के कोरोना के रहस्यों की खोज करेगा।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 5 दिसंबर 2024 को अपना प्रोबा-3 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV-XL रॉकेट द्वारा किया गया। रॉकेट ने दो सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में स्थापित किया और केवल 26 मिनट में इन सैटेलाइट्स को उनकी निर्धारित अंडाकार कक्षा में पहुंचा दिया। प्रोबा-3 मिशन में दो सैटेलाइट्स, कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट और ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट, लॉन्च किए गए हैं, जिनका कुल वजन 550 किलोग्राम है। कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट 310 किलोग्राम वजनी है और यह सूरज की दिशा में खड़ा रहेगा।


यह सैटेलाइट सूरज के कोरोना की स्टडी करेगा और इसमें एसपीआईआईसीएस (ASPIICS) नामक एक खास इंस्ट्रूमेंट लगा है, जो सूरज के बाहरी और अंदरूनी कोरोना के बीच के गैप की स्टडी करेगा। दूसरा सैटेलाइट, ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट, 240 किलोग्राम वजनी है और यह कोरोनाग्राफ के पीछे रहेगा। यह सैटेलाइट सूरज के कोरोना से मिलने वाले डेटा की स्टडी करेगा। दोनों सैटेलाइट एक साथ मिलकर 150 मीटर की दूरी पर पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए सूरज के कोरोना की गहरी जांच करेंगे।


प्रोबा-3 का उद्देश्य सूरज के कोरोना की स्टडी करना है, जो पृथ्वी पर आने वाले अंतरिक्ष मौसम और सौर हवाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इस मिशन के जरिए वैज्ञानिक सूरज के डायनेमिक्स और उसके पृथ्वी पर प्रभाव को समझने में मदद करेंगे, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष मौसम के प्रभावों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।



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