Bihar : जमीन माफिया से लेकर पेपर लीक-मानव तस्करी तक के मामलों में होगी सख्त कार्रवाई; जानें किस-किस अपराध पर लगेगा CCA
संशोधन में CCA लगाने के लिए आवश्यक आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े मानकों को भी सख्त किए जाने की बात सामने आई है।
पटना। बिहार में असामाजिक तत्वों और संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने बिहार कंट्रोल ऑफ क्राइम्स एक्ट (CCA) के प्रावधानों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। संशोधन के बाद गंभीर अपराधों और ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों पर CCA की कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। बिहार विधानसभा ने जुलाई 2026 में अपराध नियंत्रण से जुड़े संशोधन विधेयक को पारित किया था।
जमीन माफिया और पेपर लीक गिरोह भी आएंगे दायरे में
संशोधित प्रावधानों के तहत सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने अथवा उसे बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने वाले अपराधियों पर कार्रवाई की जा सकेगी। जमीन माफिया, पेपर लीक और संगठित कदाचार जैसे मामलों में सक्रिय अपराधियों को भी CCA के दायरे में लाने का रास्ता साफ किया गया है।
इसके साथ ही अवैध खनन, वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने, सोशल मीडिया के जरिए जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर नफरत फैलाने, मानव तस्करी तथा विस्फोटक पदार्थों और हथियारों से जुड़े गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
DM की शक्तियां होंगी ज्यादा प्रभावी
CCA के तहत जिला दंडाधिकारी को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई तरह के अधिकार प्राप्त हैं। इनमें किसी व्यक्ति को जिले या उसके किसी हिस्से से बाहर जाने का आदेश देना, उसकी गतिविधियों की निगरानी करना और निश्चित अंतराल पर पुलिस के समक्ष हाजिरी लगाने का निर्देश देना शामिल है। कानून के तहत ऐसे प्रतिबंधात्मक आदेश अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए दिए जा सकते हैं और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की समीक्षा भी हो सकती है।
व्यवस्था के तहत जरूरत पड़ने पर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों की निगरानी, कुछ वस्तुओं के कब्जे या इस्तेमाल पर प्रतिबंध और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए आवश्यक अन्य निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
कार्रवाई के लिए अपराध का रिकॉर्ड भी अहम
संशोधन में CCA लगाने के लिए आवश्यक आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े मानकों को भी सख्त किए जाने की बात सामने आई है। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में कार्रवाई करना है जहां अपराधी की गतिविधियां लगातार सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर रही हों।
हालांकि, CCA जैसी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई में पुलिस रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्य और जिला प्रशासन की वैधानिक संतुष्टि महत्वपूर्ण होती है। पटना हाईकोर्ट ने भी हाल के एक मामले में स्पष्ट किया है कि DM की शक्ति का इस्तेमाल कानूनी शर्तों और पर्याप्त सामग्री के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
छह महीने तक जिला बदर का प्रावधान
CCA के तहत DM किसी चिह्नित व्यक्ति को जिले या निर्धारित क्षेत्र से बाहर रहने का आदेश दे सकते हैं। साथ ही संबंधित व्यक्ति को निर्धारित थाने में रिपोर्ट करने या अपनी गतिविधियों की जानकारी देने के लिए कहा जा सकता है।
राज्य सरकार ने मार्च 2026 में भी CCA की धारा 12(2) के तहत जिला दंडाधिकारियों को अगले छह महीने तक इन शक्तियों के इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया था।
अपील का भी रहेगा रास्ता
जिला प्रशासन की ओर से जारी जिला बदर या अन्य प्रतिबंधात्मक आदेश से प्रभावित व्यक्ति के लिए कानून में निर्धारित अपीलीय व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। इसका उद्देश्य प्रशासनिक कार्रवाई के साथ कानूनी सुरक्षा और समीक्षा की प्रक्रिया को बनाए रखना है।
BNS और नए साक्ष्य कानून के अनुरूप बदलाव
संशोधन में पुराने IPC और Indian Evidence Act, 1872 के संदर्भों को नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप अपडेट करने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। अब संदर्भित प्रावधानों में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 और Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA), 2023 को शामिल किया जा रहा है। ये नए आपराधिक कानून देशभर में 1 जुलाई 2024 से लागू हैं।
संगठित अपराध पर सरकार का सख्त संदेश
नए प्रावधानों का व्यापक उद्देश्य जमीन पर अवैध कब्जे, पेपर लीक, अवैध खनन, मानव तस्करी और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली संगठित गतिविधियों पर प्रशासनिक कार्रवाई को मजबूत करना है। सरकार की कोशिश है कि गंभीर अपराधों में लगातार सक्रिय लोगों की गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाई जा सके और कानून-व्यवस्था को मजबूत रखा जाए।