Nepal: नई दिल्ली: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,290 हो गई है। वहीं 4,798 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में बचाव दल लगातार लोगों की तलाश कर रहे हैं।

7,932 पुलिसकर्मी 65 इलाकों में तैनात

नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ प्रभावित 65 क्षेत्रों में 7,932 पुलिसकर्मी राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। इनमें से 25 पुलिसकर्मियों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। अब तक 8,127 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 3,631 लोग अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं।

सुरंग में फंसे लोगों की तलाश जारी

भोटेकोशी बाढ़ के बाद त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान नौवें दिन भी जारी है। बचाव दल सुरंग के अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। फंसे लोगों की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।

शवों की पहचान के लिए DNA जांच

लापता लोगों की पहचान के लिए भारत सरकार ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत में रह रहे लापता लोगों के प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों के DNA नमूने लिए जाएंगे। इनमें माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन शामिल हैं। इन नमूनों से नेपाल में मिले अज्ञात शवों की पहचान में मदद मिलेगी।

1,862 DNA सैंपल लिए गए

नेपाल में अब तक मृतकों और उनके परिजनों के 1,862 DNA नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें 1,143 नमूने शवों से और 719 परिजनों से लिए गए हैं। पुलिस के मुताबिक 916 शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है, जबकि 1,141 शवों की पहचान अभी बाकी है।

भारत ने 166 लोगों को बचाया

भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के अनुसार, बाढ़ की जानकारी मिलते ही भारत ने नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय शुरू कर दिया था। नेपाल सेना की मदद से अब तक 166 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े लोग और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले भारतीय भी शामिल हैं।

21.5 टन राहत सामग्री भेजी

भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की नई खेप भेजी है। भारतीय वायुसेना के दो C-130J विमान 21.5 टन सामान लेकर काठमांडो पहुंचे। इसमें मेडिकल सप्लाई, जरूरी राहत सामग्री और फोरेंसिक किट शामिल हैं।

जलवायु मुआवजे पर नेपाल की सफाई

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल ने भारत, चीन या अमेरिका से किसी तरह के जलवायु मुआवजे की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि नेपाल चाहता है कि आपदा को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के संदर्भ में देखा जाए और हिमालयी क्षेत्र के देशों को मिलकर आपदा से निपटने की तैयारी करनी चाहिए।

9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 कर्मचारी

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद सुरंग में फंसे दो जलविद्युत कर्मचारियों को 9 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इनमें 30 वर्षीय संजय शाह भी शामिल हैं, जो अपर त्रिशूली-3A परियोजना में मैकेनिकल फोरमैन हैं।

170 मीटर गहराई से किया रेस्क्यू

बचावकर्मियों ने संजय शाह को सुरंग के अंदर करीब 170 मीटर की गहराई से मलबे के बीच बने संकरे रास्ते से बाहर निकाला। शाह ने बताया कि 9 दिनों तक बिना भोजन-पानी के रहना बेहद मुश्किल था। वे और उनके साथी लगातार महामंत्र का जाप करते रहे और भगवान से जान बचाने की प्रार्थना करते रहे।

बचाव अभियान अब भी जारी

दोनों कर्मचारियों को बाहर निकालने के बाद हेलीकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया। नेपाल के बचाव दलों के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी अभियान में मदद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरंग में किसी अन्य व्यक्ति के जीवित होने की संभावना को देखते हुए तलाश जारी रखी जाएगी।

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