न्यूयॉर्क। पश्चिम एशिया में सुलग रही संघर्ष की आग के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है। इसके तहत, यदि अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करता है और नाकेबंदी हटाता है, तो ईरान सात दिन के भीतर रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को फिर से खोलने के लिए तैयार है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और कच्चे तेल की कीमतों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

क्या है ईरान का पूरा प्रस्ताव?

ईरान की इस नई कूटनीतिक पहल का मुख्य मकसद अमेरिका के साथ रुकी हुई बातचीत को पटरी पर लाना है। तेहरान ने यह संदेश मध्यस्थ देशों के ज़रिए वाशिंगटन तक पहुँचाया है।

योजना के मुताबिक, तेहरान संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान न्यूयॉर्क में मध्यस्थ देशों के साथ इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा करने की तैयारी में है।

हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच किसी भी सीधी मुलाकात की संभावना से फिलहाल इनकार किया है, लेकिन यह जरूर साफ किया है कि यदि अमेरिका गंभीरता दिखाता है, तो समझौते के रास्ते खुल सकते हैं।

अमेरिका से क्या चाहती है तेहरान सरकार?

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान चाहता है कि अमेरिका उस सामरिक समुद्री मार्ग के आसपास चल रहे अपने सैन्य अभियानों को रोके। ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों और नाकेबंदी को पूरी तरह हटाया जाए। और तेहरान की पुरानी शर्तों में उसकी विदेशी संपत्तियों को बहाल करना भी शामिल है।

वैश्विक तेल बाज़ार पर दिखा असर

जैसे ही यह खबर सामने आई, उसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ारों में तुरंत देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतें जो आसमान छू रही थीं, उनमें अचानक गिरावट दर्ज की गई।

सत्र के उच्चतम स्तर से ब्रेंट क्रूड में 3.5% से अधिक की बड़ी गिरावट आई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 2.25% की नरमी दर्ज की गई। इस सकारात्मक संकेत के बाद कच्चे तेल की कीमतें 99 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं।

बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जलमार्ग दोबारा खुलता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता और चिंताएं काफी हद तक कम हो जाएंगी।

अब देखना यह है कि क्या अमेरिका तेहरान की इस शर्त पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है या पश्चिम एशिया का यह तनाव और लंबा खिंचता है।

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