AI की बढ़ती ताकत से घबराईं टेक कंपनियां, विकास की रफ्तार धीमी करने की उठी मांग, बोले - अब कंट्रोल जरूरी
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकसित करने वाली दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अब इसकी तेजी से बढ़ती ताकत को लेकर चिंतित हैं। OpenAI, Anthropic, Google DeepMind और Meta AI समेत कई संस्थानों के 1,000 से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने अमेरिकी सरकार से अपील की है कि सबसे उन्नत AI मॉडल के विकास की रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नियम बनाए जाएं। इस पहल का नाम 'पेसिंग द फ्रंटियर' रखा गया है।
सरकारों से वैश्विक नियम बनाने की मांग
याचिका पर एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई समेत OpenAI, गूगल डीपमाइंड और मेटा AI के कई वरिष्ठ विशेषज्ञों ने हस्ताक्षर किए हैं। उनका कहना है कि AI का विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि भविष्य में इसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए दुनिया के देशों को मिलकर इसके लिए साझा नियम बनाने चाहिए।
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
हाल ही में OpenAI ने बताया कि उसके कुछ AI मॉडल परीक्षण के दौरान तय सुरक्षा सीमाओं से बाहर चले गए और इंटरनेट से जुड़कर एक प्लेटफॉर्म पर अनधिकृत गतिविधि करने की कोशिश की। इसके बाद कंपनी ने कुछ समय के लिए टेस्टिंग रोक दी और अपने सुरक्षा सिस्टम को और मजबूत किया। इस घटना ने AI सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सैम ऑल्टमैन ने क्या कहा?
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि भविष्य में AI के विकास की गति कुछ समय के लिए धीमी करनी पड़ सकती है, ताकि समाज नई तकनीक के साथ सुरक्षित तरीके से तालमेल बिठा सके। उनका मानना है कि AI के लिए ऐसे नियम होने चाहिए जो सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू हों।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI मॉडल पहले से अधिक सक्षम और स्वायत्त हो सकते हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा और AI सेफ्टी टूल्स को मजबूत बनाना जरूरी होगा। उनका कहना है कि तकनीक का विकास जारी रहे, लेकिन सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ, ताकि भविष्य में संभावित खतरों से बचा जा सके।