Nirmal Purja : PoK की चोटी पर बर्फीले तूफान के चपेट में आने से नेपाल के मशहूर पर्वतारोही का निधन

Update: 2026-08-01 12:45 GMT

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) स्थित काराकोरम पर्वतमाला में हुए भीषण हिमस्खलन ने पर्वतारोहण जगत को गहरा सदमा दिया है। 8,047 मीटर ऊंची ब्रॉड पीक पर आए हिमस्खलन में नेपाल मूल के विश्वप्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की मौत हो गई। उनकी पर्वतारोहण कंपनी एलीट एक्सपेड ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनके निधन की पुष्टि की।

रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हुई मौत की पुष्टि

जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को ब्रॉड पीक पर भारी हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा समेत अभियान में शामिल कई पर्वतारोही लापता हो गए थे। खराब मौसम और भारी बर्फबारी के बीच कई घंटों तक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसके बाद पुर्जा समेत कई पर्वतारोहियों के हादसे में जीवित नहीं बचने की पुष्टि हुई।

गाइड बहादुर गुरूंग और नीमा शेरपा की भी मौत

एलीट एक्सपेड के मुताबिक, इस हादसे में निर्मल पुर्जा के साथ उनके पर्वतारोहण साथी और गाइड बहादुर गुरूंग तथा नीमा शेरपा की भी जान चली गई। कंपनी ने मृतकों के परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना जताते हुए इस मुश्किल समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है।

2019 में बनाया था ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड

निर्मल पुर्जा को दुनिया के महान पर्वतारोहियों में गिना जाता था। नेपाल में जन्मे पुर्जा ब्रिटेन की स्पेशल बोट सर्विस में भी सेवा दे चुके थे। साल 2019 में उन्होंने महज 6 महीने और 6 दिनों में दुनिया की सभी 14 आठ-हजारी चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी इस असाधारण यात्रा पर बनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री ‘14 Peaks: Nothing Is Impossible’ ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई।

दूसरी बार सभी 14 आठ-हजार मीटर चोटियां फतह करने का था लक्ष्य

हालिया अभियान में निर्मल पुर्जा का लक्ष्य बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के दुनिया की सभी 14 आठ-हजारी चोटियों को दूसरी बार फतह करने वाला पहला पर्वतारोही बनना था। वह इस महत्वाकांक्षी अभियान के लिए लगातार तैयारी कर रहे थे। ब्रॉड पीक पर हुए हादसे ने उनके इस अभियान को हमेशा के लिए रोक दिया।

चुनौतीपूर्ण चोटियों में शामिल है ब्रॉड पीक

ब्रॉड पीक दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। यहां लगातार बदलता मौसम, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा पर्वतारोहियों के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। हादसे के वक्त भी मौसम बेहद खराब था, जिसके चलते बचाव अभियान में मुश्किलें आईं। ड्रोन और जमीनी टीमों की मदद से खोज अभियान चलाया गया, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

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