MP में UCC लाने की तैयारी, CM डॉ. मोहन यादव बोले- एक विवाह का नियम होगा लागू, मानसून सत्र में आएगा विधेयक

Update: 2026-07-17 15:39 GMT

MP : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिया है कि आगामी मानसून सत्र में यूसीसी से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है, ताकि व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित की जा सके।

एक विवाह के नियम पर दिया जोर

कटनी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि देश में "एक देश, एक विधान और एक निशान" की अवधारणा है, तो नागरिकों के लिए भी समान कानून होने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में एक विवाह के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तीन तलाक जैसी प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान किए जाएंगे।

शादी, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े कानून होंगे शामिल

प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण जैसे विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

कुछ समुदायों को मिल सकती है छूट

सरकारी स्तर पर तैयार किए जा रहे मसौदे के अनुसार, प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से आदिवासी समुदायों और कुछ पारंपरिक घुमंतु जनजातियों को बाहर रखने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया जा सकता है।

मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विधानसभा में होगा पेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने से पहले राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे मानसून सत्र के दौरान सदन में चर्चा और पारित कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

बयान पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री के बयान पर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के लिए सभी पत्नियों के साथ समान न्याय करना संभव नहीं है, तो बहुविवाह उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे न्याय और समानता के सिद्धांत से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया।

विधेयक बनने के बाद ही लागू होंगे प्रावधान

फिलहाल यूसीसी से संबंधित सभी प्रस्ताव प्रारंभिक विधायी प्रक्रिया में हैं। राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया विधेयक विधानसभा से पारित होने और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही कानून का रूप ले सकेगा। तब तक प्रस्तावित प्रावधान लागू नहीं माने जाएंगे।

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