MP : पेंशन फाइल अटकाने वालों पर होगी कार्रवाई, CM डॉ. मोहन यादव ने तय की डेडलाइन
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।
MP Pension Update : भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब कर्मचारियों को पेंशन प्रकरण के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने या फाइल के लंबे समय तक अटके रहने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल यानी SCPPC के जरिए पेंशन प्रकरणों के ऑनलाइन निराकरण की व्यवस्था को और सख्त किया गया है। इसके तहत फाइल के प्रत्येक स्तर के लिए अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है।
नई पेंशन फाइल 15 कार्य दिवस में होगी पूरी
नई पेंशन के प्रकरणों के लिए कुल 15 कार्य दिवस की अधिकतम समय-सीमा तय की गई है। इसमें क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के स्तर पर अधिकतम 5-5 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। यानी फाइल किसी एक स्तर पर अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखी जा सकेगी।
वहीं पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण के लिए कुल 10 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। इसमें क्रियेटर को 4 दिन, वेरीफायर को 3 दिन और एप्रूवर को 3 दिन में प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वेतन निर्धारण के मामलों के लिए भी 11 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है।
पेंशन में देरी हुई तो तय होगी जवाबदेही
नई व्यवस्था में फाइल की निगरानी ऑनलाइन की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि पेंशन प्रकरण किस स्तर पर लंबित है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय-सीमा में प्रकरण का निराकरण नहीं होने पर संबंधित स्तर की जवाबदेही तय की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर जरूरत के अनुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में अनावश्यक देरी न हो। इसके लिए सेवानिवृत्ति से पहले ही पेंशन प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
2025 में हुआ था केंद्रीकृत पेंशन सेल का गठन
शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने के उद्देश्य से वित्त विभाग ने 9 जून 2025 को राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल यानी SCPPC का गठन किया था। इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से पहले की व्यवस्था को समाप्त कर पेंशन प्रकरणों के ऑनलाइन निराकरण की प्रक्रिया SCPPC के माध्यम से लागू की गई।
इस केंद्रीकृत व्यवस्था का उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को पारदर्शी, ऑनलाइन और जवाबदेह बनाना है, ताकि फाइलों की अनावश्यक देरी और कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या को कम किया जा सके।
बीजेपी ने बताया महत्वपूर्ण फैसला, कांग्रेस ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बीजेपी इसे कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। पार्टी का कहना है कि समय-सीमा तय होने से पेंशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
वहीं कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने की पहल इतने वर्षों बाद क्यों की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों पर पहले ही प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे।
कर्मचारियों के अन्य मुद्दों पर भी सरकार का फोकस
पेंशन के साथ ही कर्मचारियों से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार की ओर से पहल की बात कही गई है। इनमें सितंबर से विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने, महंगाई भत्ते को 58 प्रतिशत करने और कर्मचारियों को एरियर भुगतान की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इसके अलावा पेंशनर्स को महंगाई राहत, स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, भत्तों के पुनरीक्षण, संविदा कर्मचारियों के हितों, वेतन विसंगतियों के समाधान और कर्मचारियों के आवास निर्माण पर भी जोर देने की बात सामने आई है। महिला कर्मचारियों के लिए महिला आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने और 7 दिन अतिरिक्त आकस्मिक अवकाश जैसे प्रावधान भी चर्चा में हैं।
कर्मचारियों ने फैसले का किया स्वागत
पेंशन प्रकरणों के लिए तय की गई समय-सीमा को कर्मचारियों ने सकारात्मक कदम बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि अगर ऑनलाइन व्यवस्था के तहत निर्धारित डेडलाइन का सख्ती से पालन होता है तो सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन मिलने में होने वाली परेशानियों में काफी कमी आ सकती है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी।