MP News : वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में बोले CM मोहन यादव: न्याय के सिंहासन पर रिश्तों की नहीं चलेगी पहचान

इंदौर में आयोजित एमपीएसएलएसए वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय न्याय परंपरा और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था पर जोर दिया।

Update: 2026-08-08 09:59 GMT

इंदौर। इंदौर में आयोजित एमपीएसएलएसए वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय न्याय परंपरा और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति न्याय के सिंहासन पर बैठता है, तो उसके लिए अपना और पराया कोई मायने नहीं रखता। मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने राजधर्म निभाते हुए अपने निजी रिश्तों को भी न्याय की कसौटी पर परखा था।

राजधर्म में निजी रिश्तों से ऊपर न्याय

सीएम मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने ‘पंच परमेश्वर’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय करने वाले व्यक्ति से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है। मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के उस प्रयास का भी जिक्र किया, जिसमें महाभारत का युद्ध रोकने के लिए पांडवों की ओर से केवल पांच गांव देने का प्रस्ताव रखा गया था।

पेपर लीक मामलों पर सरकार सख्त

मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य से जुड़े पेपर लीक मामलों पर सरकार की सख्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से करने के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की पहल की गई है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति के बाद इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करना है, ताकि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

UCC और न्याय व्यवस्था में तकनीक पर जोर

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता यानी UCC का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने रंजना देसाई समिति की सिफारिशों के आधार पर UCC विधेयक पारित किया है। उन्होंने इसे समानता और एकरूप न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वर्चुअल सुनवाई, जीरो FIR और ‘वन डेटा-वन केस’ जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं को न्याय प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सुगम बनाने वाला बताया।

कानून मंत्री बोले- न्याय सामूहिक जिम्मेदारी

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल अदालतों या न्यायाधीशों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लीगल डिफेंस काउंसिल, कानून के विद्यार्थियों, रिसर्चर्स और पैरा-लीगल वॉलंटियर्स से जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रो-बोनो लीगल सर्विस को केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

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