MP: नहीं रहे मध्यप्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन, 77 की उम्र में इंदौर में ली आखिरी सांस
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MP: उज्जैन। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारस जैन का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। सोमवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व मंत्री पारस जैन के पार्थिव शरीर को उज्जैन स्थित उनके निवास अरिहंत नगर, हीरामिल मार्ग लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आम नागरिक पहुंचे।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पारस जैन के निवास पहुंचे और उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारस जैन के साथ उनका राजनीतिक जीवन का लंबा सफर रहा। उन्होंने कहा कि पारस जैन "पारस पहलवान" के नाम से भी प्रसिद्ध थे और एक सरल, मिलनसार एवं कर्मठ जननेता थे। मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश और उज्जैन के विकास के लिए अनेक सराहनीय कार्य किए, जिन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।
मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए पारस जैन के परिवार ने उनके नेत्रदान एवं त्वचा दान का निर्णय लिया, जिसकी समाज में व्यापक सराहना हो रही है।
विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का सफर
पारसचंद्र जैन मध्य प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया। वे वर्ष 1990 से 1998 तथा 2003 से लगातार विधायक रहे। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया तथा 2016 के मंत्रिमंडल विस्तार में ऊर्जा एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई।
प्रारंभिक जीवन
पारस जैन का जन्म 20 जून 1950 को उज्जैन में स्व. समरथमल जैन एवं श्रीमती कैलाशबाई जैन के घर हुआ था। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम की शिक्षा प्राप्त की और बाद में पारिवारिक अनाज व्यवसाय से जुड़े। व्यायाम और खेलों के प्रति विशेष रुचि के कारण वे "पारस पहलवान" के नाम से भी प्रसिद्ध थे। वर्ष 1978 में उनका विवाह अंगूरबाला जैन से हुआ। धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में उनकी विशेष सक्रियता रही और वे सिंहस्थ आयोजन से भी लंबे समय तक जुड़े रहे।
राजनीतिक यात्रा
उनकी राजनीतिक शुरुआत छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से हुई। बाद में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और इसके बाद कई बार जनता का विश्वास हासिल किया।
आज दोपहर निकलेगी अंतिम यात्रा
पूर्व मंत्री पारस जैन की अंतिम यात्रा आज दोपहर उनके निवास अरिहंत नगर, हीरामिल मार्ग, उज्जैन से निकाली जाएगी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और शहरवासियों के शामिल होने की संभावना है।