MP सरकार का बड़ा फैसला, एनालॉग पनीर पर लगा बैन

मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

Update: 2026-08-12 10:49 GMT

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम खाद्य सुरक्षा और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, आसपास के राज्यों में इस उत्पाद पर पहले से रोक होने के कारण इसके मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर खपाए जाने की आशंका थी। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए कार्रवाई के निर्देश

राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संबंधित अधिकारियों को एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लागू करने के लिए जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि प्रदेश में किसी भी ऐसे खाद्य उत्पाद की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।

मध्य प्रदेश से पहले महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। ऐसे में मध्य प्रदेश इस तरह की रोक लगाने वाला देश का चौथा राज्य बताया जा रहा है।

त्योहारों के सीजन में बढ़ जाती है पनीर की मांग

त्योहारों के मौसम में दूध से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। आने वाले रक्षाबंधन को देखते हुए भी बाजार में पनीर, मावा और अन्य डेयरी उत्पादों की खपत बढ़ने की संभावना है। सरकार इसी दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर विशेष निगरानी कर रही है।

राज्य मंत्री ने बताया कि 20 जुलाई से प्रदेश में शुद्ध दूध और मावा उपलब्ध कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत खाद्य पदार्थों की जांच और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

ग्राहकों के लिए पहचान करना आसान नहीं

एनालॉग पनीर को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह देखने में सामान्य पनीर जैसा ही नजर आ सकता है। ऐसे में आम ग्राहक के लिए दोनों के बीच अंतर पहचानना मुश्किल हो सकता है। सरकार का कहना है कि यदि किसी खाद्य उत्पाद में दूध से अलग सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे उचित तरीके से लेबल और जानकारी के साथ बेचा जाना चाहिए।

राज्य मंत्री के अनुसार, संबंधित नियमों के बावजूद कई जगहों पर उपभोक्ताओं को पूरी जानकारी दिए बिना एनालॉग पनीर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। सरकार ने ऐसे मामलों में नियमों के तहत कार्रवाई की बात कही है।

क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर दिखने में पारंपरिक पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से तैयार करना जरूरी नहीं होता। इसमें वनस्पति वसा या तेल, मिल्क प्रोटीन और अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी उत्पादन लागत पारंपरिक दूध से बने पनीर की तुलना में कम हो सकती है।

इसी वजह से इसका इस्तेमाल कुछ होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों में किए जाने की बात सामने आती रही है। पिज्जा, बर्गर, सैंडविच और अन्य खाद्य पदार्थों में इसके इस्तेमाल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।

सरकार का फोकस शुद्ध खाद्य पदार्थों पर

मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान लोगों तक शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से दूध, मावा, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की जांच बढ़ाई जा रही है। एनालॉग पनीर पर रोक के बाद अब इसके उत्पादन, बिक्री और बाजार में इस्तेमाल पर निगरानी और सख्त होने की संभावना है।

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