MP News : 119 साल पुराने बड़े गणेश मंदिर में 4 दिन पहले मना स्वतंत्रता दिवस, आजादी का मुहूर्त तय करने से जुड़ी है खास परंपरा

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में पंचांग की तिथि के अनुसार मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, व्यास परिवार के मुताबिक आजादी के समय शुभ मुहूर्त तय करने में

Update: 2026-08-11 15:24 GMT

MP News : उज्जैन। देशभर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में इस बार आजादी का पर्व चार दिन पहले ही मना लिया गया। मंगलवार, 11 अगस्त को मंदिर परिसर में तिरंगा फहराया गया और विशेष पूजा-अर्चना के साथ स्वतंत्रता दिवस का आयोजन हुआ।

इस आयोजन की खास वजह अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि हिंदू पंचांग की तिथि है। मंदिर से जुड़े व्यास परिवार के अनुसार, यहां आजादी के समय तय की गई परंपरा के तहत हर साल श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

1947 में 15 अगस्त को थी श्रावण कृष्ण चतुर्दशी

पंडितों के मुताबिक, वर्ष 1947 में 15 अगस्त को श्रावण कृष्ण चतुर्दशी की तिथि थी। इसी तिथि को शुभ मानकर स्वतंत्रता से जुड़े मुहूर्त का निर्धारण किया गया था। इस साल श्रावण कृष्ण चतुर्दशी 11 अगस्त को पड़ रही है। इसी कारण बड़े गणेश मंदिर में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया गया।

तिरंगा यात्रा के बाद मंदिर के शिखर पर फहराया झंडा

स्वतंत्रता दिवस के आयोजन के लिए मंदिर परिसर को तिरंगे के रंगों से सजाया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। मंदिर से जुड़े परिवार के पुराने आवास से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जो बड़े गणेश मंदिर पहुंची। यहां ध्वज पूजन और भगवान गणेश की पूजा के बाद महाआरती की गई। देशभक्ति के नारों और गीतों के बीच मंदिर के शिखर पर तिरंगा फहराया गया। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

आजादी के समय से चली आ रही परंपरा

व्यास परिवार के अनुसार, मंदिर में इस तरह स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा नई नहीं है। यह देश की आजादी के समय से चली आ रही पारिवारिक और धार्मिक परंपरा है। परिवार से जुड़े अक्षत व्यास बताते हैं कि आजादी से पहले स्वतंत्रता प्राप्ति के शुभ समय को लेकर तत्कालीन नेतृत्व ने उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्य नारायण व्यास से सलाह ली थी। परिवार के मुताबिक, इसी दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित व्यास से देश की स्वतंत्रता के लिए शुभ समय के बारे में चर्चा की थी। पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर पंडित व्यास ने श्रावण कृष्ण चतुर्दशी को शुभ बताया था। परिवार का दावा है कि बाद में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित सूर्य नारायण व्यास को पत्र लिखकर आभार भी जताया था।

आधी रात को आजादी का समय तय करने की भी कहानी

व्यास परिवार से जुड़े डॉ. राजशेखर व्यास के अनुसार, पंडित सूर्य नारायण व्यास ने 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि करीब 12 बजे का समय स्वतंत्रता के लिए उपयुक्त बताया था। परिवार के अनुसार, इसके पीछे उस समय भारत की कुंडली में वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाना था। पंडित व्यास का मत था कि स्थिर लग्न में देश स्वतंत्र होगा तो आजादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थिर रहने की संभावना रहेगी। परिवार का यह भी कहना है कि इसी सलाह के आधार पर 14-15 अगस्त की रात स्वतंत्रता का ऐतिहासिक क्षण तय किया गया था।

79 साल से पंचांग की तिथि पर आयोजन

व्यास परिवार के मुताबिक, बड़े गणेश मंदिर में श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा आजादी के समय से ही चली आ रही है। शुरुआत में यह आयोजन परिवार तक सीमित था। परिवार के सदस्य मंदिर में एकत्र होकर ध्वज पूजन और धार्मिक अनुष्ठान करते थे। समय के साथ आयोजन बड़ा होता गया और अब मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी इसमें शामिल होते हैं।

व्यास परिवार का पारिवारिक मंदिर है बड़ा गणेश

महाकाल मंदिर के पास स्थित बड़ा गणेश मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। परिवार के अनुसार, यह मंदिर किसी राजा या रजवाड़े ने नहीं बनवाया था, बल्कि यहां स्थापित प्रतिमाओं का संबंध व्यास परिवार के पूर्वजों से है। मंदिर में परिवार की कुलदेवी सहित अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है। इसी वजह से मंदिर का धार्मिक और पारिवारिक महत्व भी खास है।

119 साल पुराना है मंदिर

व्यास परिवार के अनुसार, बड़े गणेश मंदिर की स्थापना वर्ष 1907 के आसपास हुई थी। इसी दौर में पुणे में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ओर से आयोजित ज्योतिष महाधिवेशन में उज्जैन के पंडित नारायण जी व्यास भी शामिल हुए थे। परिवार से जुड़ी मान्यता के अनुसार, उस सम्मेलन में देश के भविष्य और गणतंत्र को लेकर चर्चा हुई थी। पंडित नारायण जी व्यास ने भगवान गणेश को गणतंत्र के आराध्य देव के रूप में बताते हुए भारत में बड़े गणतंत्र की स्थापना की बात कही थी। इसके बाद उज्जैन लौटकर उन्होंने बड़े गणेश जी की स्थापना कराई। हालांकि, ये बातें मुख्य रूप से परिवार की परंपरा और मान्यताओं के रूप में बताई जाती हैं।

धार्मिक आस्था के साथ देशभक्ति का संदेश

बड़े गणेश मंदिर में होने वाला यह आयोजन धर्म और राष्ट्रभक्ति के अनोखे मेल के रूप में देखा जाता है। एक तरफ भगवान गणेश की पूजा और महाआरती होती है, तो दूसरी ओर तिरंगा फहराकर देश की आजादी और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जाता है। परिवार का कहना है कि इस परंपरा का उद्देश्य आजादी के उस ऐतिहासिक दौर को याद रखना और नई पीढ़ी को स्वतंत्रता के महत्व से जोड़ना है।

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