MP Cabinet : एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला : यूसीसी ड्राफ्ट को मंजूरी, मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक

Update: 2026-07-19 13:05 GMT

MP Cabinet : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इसके मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल के निकट ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य ई-बस से बैठक स्थल पहुंचे। बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। सरकार अब आगामी विधानसभा मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करेगी। विधेयक पारित होने पर मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पांचवां राज्य बन सकता है।

रंजना प्रकाश देसाई समिति की रिपोर्ट पर लगी मुहर

कैबिनेट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तैयार मसौदे को स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय देने की भावना से तैयार किया गया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील भी की।

9.58 लाख सुझाव, 93% से अधिक लोगों ने किया समर्थन

सरकार के अनुसार 27 अप्रैल 2026 को गठित सात सदस्यीय समिति ने विभिन्न राज्यों के यूसीसी मॉडल, मौजूदा कानूनों और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन किया। सुझावों के लिए वेब पोर्टल शुरू किया गया और प्रदेशभर में 50 से अधिक जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। पोर्टल पर 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जबकि बैठकों के माध्यम से भी हजारों सुझाव मिले। सरकार का दावा है कि 93.54 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी का समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकार, संपत्ति में बराबरी और भेदभावपूर्ण तलाक प्रावधान समाप्त करने की वकालत की।

यूसीसी में विवाह और तलाक को लेकर बड़े बदलाव

प्रस्तावित कानून के तहत सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह मान्य होगा। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। पुरुषों की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष निर्धारित की गई है। मौखिक तलाक और गैर-कानूनी पंचायतों के फैसलों को मान्यता नहीं मिलेगी। विवाह का समापन केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।

निकाह हलाला और बहुविवाह पर सख्ती

विधेयक में बहुविवाह पर रोक का प्रावधान किया गया है। निकाह हलाला जैसी किसी भी अपमानजनक या बाध्यकारी शर्त को बढ़ावा देना दंडनीय अपराध माना जाएगा। महिलाओं को विवाह निरस्त कराने सहित कई नए कानूनी अधिकार भी दिए गए हैं।

संपत्ति और बच्चों के अधिकार होंगे समान

यूसीसी के मसौदे में बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रस्ताव है। विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी या अन्य माध्यमों से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। 'अवैध संतान' जैसी अवधारणा को समाप्त करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उत्तराधिकार के मामलों में माता-पिता को भी समान अधिकार दिए जाएंगे।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य होगा रजिस्ट्रेशन

विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान रखा गया है। लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें उत्तराधिकार के समान अधिकार मिलेंगे। यदि महिला को छोड़ दिया जाता है तो वह भरण-पोषण का दावा भी कर सकेगी।

अनुसूचित जनजातियों को मिलेगी छूट

सरकार ने स्पष्ट किया है कि संविधान के तहत संरक्षित अनुसूचित जनजातियों, पारंपरिक समुदायों तथा कुछ घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। धार्मिक रीति-रिवाजों, पूजा-पद्धति और धार्मिक स्वतंत्रता पर इस कानून का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

कैबिनेट ने तीन अन्य अहम विधेयकों को भी दी मंजूरी

यूसीसी के अलावा कैबिनेट ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक-2026, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक-2026 और निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 को भी मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से निवेश, उद्योग, उच्च शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाया जाएगा।

Tags:    

Similar News