JPSC-JSSC प्रदर्शन के दौरान पुलिस के हाथ में दिखी पेंटबॉल गन और पैलेट गन, जानें कौन-सी है ज्यादा खतरनाक

रांची में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है।

Update: 2026-08-10 09:05 GMT

रांची। रांची में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। विधानसभा मार्च के ऐलान के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों के पास पेंटबॉल गन दिखाई दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इसे पैलेट गन समझ लिया, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन स्थल पर नजर आई गन पेंटबॉल गन है।

तीन दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति

छात्रों और सरकार के बीच आंदोलन को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा तक मार्च निकालने की घोषणा की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसी दौरान पुलिस के पास मौजूद पेंटबॉल गन का वीडियो सामने आने के बाद विवाद ने नया रूप ले लिया।

पुलिस ने बताया पहचान के लिए इस्तेमाल

रांची पुलिस के मुताबिक, पेंटबॉल गन का इस्तेमाल प्रदर्शन के दौरान उपद्रव या हिंसा करने वाले लोगों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। इससे निकलने वाली रंगीन गेंद कपड़ों पर निशान छोड़ सकती है, जिससे बाद में संबंधित व्यक्ति को चिन्हित करने में मदद मिलती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों पर गंभीर चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों की पहचान करना है।

क्या होती है पेंटबॉल गन?

पेंटबॉल गन का इस्तेमाल आमतौर पर मनोरंजन और पेंटबॉल गेम में किया जाता है। इसमें रंग से भरी जिलेटिन की गेंदें इस्तेमाल की जाती हैं, जिन्हें संपीड़ित गैस या हवा के दबाव से फायर किया जाता है। गेंद लक्ष्य से टकराने पर फट जाती है और रंग का निशान छोड़ती है। हालांकि इससे चोट लगने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती, इसलिए ऐसी गन का इस्तेमाल भी सुरक्षा मानकों और उचित दूरी के साथ किया जाना जरूरी है।

पैलेट गन से बिल्कुल अलग है तकनीक और खतरा

पेंटबॉल गन को पैलेट गन से अलग समझना जरूरी है। पैलेट गन में छोटे धातु के छर्रे इस्तेमाल किए जाते हैं, जो शरीर पर गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं। आंखों जैसे संवेदनशील अंगों पर इनके इस्तेमाल से स्थायी नुकसान का खतरा भी हो सकता है। इसके विपरीत पेंटबॉल गन मुख्य रूप से रंग के निशान के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए डिजाइन की गई होती है, हालांकि नजदीक से या संवेदनशील हिस्सों पर लगने पर इससे भी चोट लग सकती है।

पुलिस के इस्तेमाल पर उठे सवाल

रांची में पेंटबॉल गन के इस्तेमाल की तस्वीरें सामने आने के बाद पुलिस की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। जहां पुलिस इसे भीड़ नियंत्रण के बजाय उपद्रवियों की पहचान का माध्यम बता रही है, वहीं छात्रों के आंदोलन में ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों पर चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में अब इस बात पर नजर रहेगी कि आगे होने वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस किस तरह की व्यवस्था अपनाती है।

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