Commercial LPG Cylinder: नई दिल्ली। देशभर में जारी गैस संकट के बीच केंद्र सरकार ने होटल और ढाबा संचालकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। यह व्यवस्था 23 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू होगी। सरकार का उद्देश्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे एलपीजी सिलेंडर से हटाकर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क की ओर स्थानांतरित करना है, ताकि ईंधन आपूर्ति अधिक सुरक्षित और सुलभ हो सके।

कोटे में बढ़ोतरी से मिलेगी राहत

मंत्रालय ने राज्यों के कमर्शियल गैस कोटे में 20 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का निर्णय लिया है, जिससे कुल आवंटन अब 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इससे पहले गैस संकट के दौरान यह हिस्सा केवल 20 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर पहले 30 प्रतिशत किया गया और अब आधा कर दिया गया है। इस फैसले से बाजार में गैस की किल्लत कम होने और व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

छोटे व्यवसायों को प्राथमिकता

पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने बताया कि अतिरिक्त गैस की आपूर्ति में सबसे पहले सड़क किनारे ढाबों और छोटे होटलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, डेयरी यूनिट्स और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित सामुदायिक रसोइयों को भी लाभ मिलेगा। प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 5 किलो वाले एफटीएल सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।

पंजीकरण जरूरी

बढ़े हुए कोटे का लाभ लेने के लिए सभी व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को तेल विपणन कंपनियों के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। कंपनियां उपभोक्ताओं का विस्तृत डेटाबेस तैयार करेंगी, जिसमें उनकी सालाना गैस खपत और उपयोग क्षेत्र की जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे कालाबाजारी और अवैध डायवर्जन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

PNG कनेक्शन अनिवार्य शर्त

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बढ़े हुए कोटे का लाभ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करेंगे। इसके लिए संबंधित शहर की गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के पास आवेदन के साथ तकनीकी तैयारियां भी पूरी करनी होंगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल गैस संकट में राहत मिलेगी, बल्कि होटल और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की परिचालन लागत कम होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

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