भोपाल। राजधानी भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है,लेकिन शहर अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। शहर में नगर निगम और स्मार्ट सिटी द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइटें महज सोपीश बनी हुई हैं। बंद पढ़ी स्ट्रीट लाइटें अब बड़ी समस्या बनती जा रही है। शहर के कई इलाकों में हफ्तों से स्ट्रीट लाइटों की सुध नहीं ली गई है। खंबो पर सिर्फ लैंप लगा हुआ है जो रात में जलता नहीं है। जिससे आए दिन वाहन चालक परेशान होते हुए नजर आते हैं। क्योंकि बारिश होने की वजह से सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं जो नजर नहीं आते और हादसों का सबब बनते हैं।

बीते दिनों ही शहर के नर्मदा पुरम रोड पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से बस ने बाइक सवारों को टक्कर मार दी थी जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। उसके बावजूद आलम यह है कि शहर में सैकड़ो स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हुई है। महापौर और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बाद भी रह वासियों की सुनवाई नहीं होती है। महापौर हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए मेयर मालती रॉय ने भी माना था कि शहर में सबसे ज्यादा शिकायतें स्ट्रीट लाइट की है। उन्होंने उसको लेकर संबंधित अधिकारी को फटकार भी लगाई थी,और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कही थी।

लेकिन महापौर की फटकार के बाद भी अधिकारी अब तक नींद से नहीं जागे हैं। शहर के एमपी नगर,मैदा मिल रोड, बोगदा पुल मार्ग,पुराना शहर नर्मदापुरम मार्ग,शैतान सिंह चौराहा, वही सुभाष नगर और रायसेन रोड पर भी कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हुई है।
नगर निगम के आंकड़ों की मानो तो वर्तमान में शहर के अंदर 60 हजार स्ट्रीट लाइट लगी है,जिसके लिए 15 करोड रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।
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