दुर्ग में अफीम की खेती के मामले में गिरफ्तार पूर्व भाजपा नेता को हाईकोर्ट से जमानत, FIR रद्द करने की याचिका खारिज, जानें कोर्ट ने कहा
Durg Opium Cultivation Case: दुर्ग में अवैध अफीम की खेती के मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। कोर्ट ने FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की।
बिलासपुर/दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में करीब 5 एकड़ खेत में कथित अवैध अफीम की खेती के मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उनकी जमानत मंजूर कर ली।
कोर्ट ने माना कि कार्रवाई के समय विनायक ताम्रकार खेत में मौजूद नहीं था और उसके कब्जे से कोई मादक पदार्थ भी बरामद नहीं हुआ था। पूर्व भाजपा नेता को कई शर्तों पर जमानत दी गई है। इनमें मुख्य रूप से दुर्ग नहीं छोड़ने की शर्त शामिल है। जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस 29 जुलाई को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसी मामले में सह आरोपी सुखराम विश्नोई और मदरूपा राम विश्नोई को 31 जुलाई को जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने विनायक ताम्रकार को भी जमानत देने का फैसला किया।
हालांकि, दूसरी याचिका में उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने अफीम की खेती से जुड़े मामले में दर्ज FIR और दाखिल आरोप पत्र को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर सबूतों की जांच कर मामले का फैसला नहीं किया जा सकता। ऐसा करना मामले की सुनवाई से पहले ही मामले की पूरी जांच करने जैसा होगा।
939 पन्नों का आरोप पत्र
इस मामले में पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि 2 आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस ने विनायक ताम्रकार समेत 3 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया था। 6 मार्च को ग्राम समोदा में जेवरा-सिरसा पुलिस चौकी की टीम ने करीब 5 एकड़ जमीन पर कार्रवाई की थी। यहां से करीब 8 करोड़ रुपए कीमत के अफीम के पौधे जब्त किए गए थे।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने अदालत में कुल 939 पन्नों का आरोप पत्र पेश किया था। इसमें अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 78 गवाहों को शामिल किया गया है। मामले में पुलिस, राजस्व, आबकारी, नारकोटिक्स और अपराध जांच से जुड़ी टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी। विनायक को 7 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में था।