CG Agriculture : धमतरी के ‘चिरपोटी टमाटर’ को मिली कानूनी पहचान, किसान बंसी लाल सोरी की पीढ़ियों पुरानी विरासत सुरक्षित
PPV&FRA के तहत मिला पंजीयन, 2016 में किया गया था आवेदन; कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से दस्तावेजीकरण के बाद 2024 में मिली आधिकारिक पहचान
CG Agriculture : धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की पारंपरिक कृषि विरासत को बड़ी पहचान मिली है। नगरी विकासखंड के ग्राम गुहनानाला के किसान बंसी लाल सोरी द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित स्थानीय ‘चिरपोटी टमाटर’ किस्म का पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) के तहत पंजीयन हुआ है। इस उपलब्धि पर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किसान बंसी लाल सोरी को सम्मानित किया।
पिता से मिली बीज बचाने की परंपरा
‘चिरपोटी टमाटर’ का संरक्षण सोरी परिवार में उनके स्वर्गीय पिता मंगलू राम सोरी के समय से होता आ रहा है। वे वर्षों तक इस स्थानीय किस्म के बीज को सुरक्षित रखकर इसका उत्पादन करते रहे। पिता के निधन के बाद बंसी लाल सोरी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और लगातार बीज का संरक्षण एवं उत्पादन करते रहे। यह किस्म इस बात का उदाहरण है कि किसान अपने पारंपरिक अनुभव और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसलों की विशिष्ट किस्मों को पीढ़ियों तक किस तरह सुरक्षित रखते हैं।
2016 में आवेदन, 2024 में मिला पंजीयन
‘चिरपोटी टमाटर’ के दस्तावेजीकरण और पंजीयन में कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी ने तकनीकी सहयोग दिया। PPV&FRA प्रभारी प्रेमलाल साहू के माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पंजीयन प्रमाण-पत्र के अनुसार इसका Registration No. REG/2016/1380 है। इसके लिए आवेदन 7 सितंबर 2016 को किया गया था, जबकि किस्म का पंजीयन 8 जनवरी 2024 को प्रदान किया गया।
क्या है PPV&FRA का कृषक किस्म पंजीयन?
PPV&FRA के तहत कृषक किस्म के पंजीयन से किसानों द्वारा लंबे समय से संरक्षित स्थानीय और पारंपरिक फसल किस्मों को औपचारिक पहचान मिलती है। इसके साथ निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत कृषक अधिकारों के संरक्षण, पारंपरिक बीजों को बढ़ावा देने और कृषि जैव-विविधता के संरक्षण में मदद मिलती है। पंजीयन किसानों के पारंपरिक कृषि ज्ञान को भी मान्यता देता है और पात्रता के अनुसार Recognition and Reward जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है।
दूसरे किसानों के लिए भी संदेश
‘चिरपोटी टमाटर’ का पंजीयन धमतरी की कृषि विविधता और पारंपरिक बीज संरक्षण की समृद्ध परंपरा को सामने लाता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने जिले के किसानों से अपील की है कि उनके पास लंबे समय से संरक्षित कोई विशिष्ट स्थानीय फसल किस्म या पारंपरिक बीज है, तो उसकी जानकारी केंद्र तक पहुंचाएं।