Nagfani Temple Dantewada: सावन सोमवार और नागपंचमी पर नागफनी मंदिर में उमड़ी आस्था, नागवंशी राजाओं से जुड़ा है इतिहास

Nagfani Temple Dantewada: दंतेवाड़ा। सावन सोमवार और नागपंचमी का पर्व एक साथ पड़ने से दंतेवाड़ा जिले के शिवालयों और नाग मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले के गीदम ब्लॉक स्थित नागफनी गांव के प्राचीन नाग देवता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचे।

Update: 2026-08-17 06:02 GMT

Nagfani Temple Dantewada: दंतेवाड़ा। सावन सोमवार और नागपंचमी का पर्व एक साथ पड़ने से दंतेवाड़ा जिले के शिवालयों और नाग मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। जिले के गीदम ब्लॉक स्थित नागफनी गांव के प्राचीन नाग देवता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचे। नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने नाग देवता को दूध अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

नागफनी का यह प्राचीन मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि करीब 11वीं-12वीं शताब्दी में नागवंशी राजाओं के शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। सावन और नागपंचमी के दौरान यहां सिर्फ दंतेवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नागपंचमी पर लगता है पारंपरिक मेला

नागपंचमी के दिन नागफनी मंदिर परिसर में हर साल पारंपरिक मेले का आयोजन होता है। सुबह से ही मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती हैं। मान्यता के अनुसार पंचमी के दिन नाग देवता की विशेष पूजा करने और दूध अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग यहां पहुंचते हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार नागवंशी राजाओं के समय से ही इस मंदिर की विशेष मान्यता रही है। ग्रामीणों ने मंदिर की ऐतिहासिक धरोहर को आज भी सहेजकर रखा है। सावन और नागपंचमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

मंदिर की मूर्तियां स्थापत्य कला की पहचान

नागफनी मंदिर का मुख्य प्रवेश पश्चिम दिशा की ओर है। मंदिर परिसर में 11वीं और 12वीं शताब्दी की कई प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं। प्रवेश द्वार के बाईं ओर शिलाखंड पर नरसिंह भगवान की प्रतिमा और दाईं ओर नृत्यांगना की मूर्ति स्थापित है। इन मूर्तियों की ऊंचाई करीब दो से तीन फीट बताई जाती है।

मंदिर के गर्भगृह में नाग-नागिन की प्रतिमा के साथ भगवान गणेश की मूर्ति और शिलाखंड में द्वारपाल की प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर की नक्काशी और प्राचीन मूर्तियां इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाती हैं।

युद्ध पर जाने से पहले नाग देवता की पूजा करते थे राजा

इतिहासकारों के अनुसार बारसूर क्षेत्र में नागवंशी राजाओं के शासन के दौरान इस क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण कराया गया था। इनमें गीदम-बारसूर मार्ग पर नागफनी गांव स्थित नाग देवता का मंदिर भी शामिल है। मान्यता है कि नागवंशी राजा युद्ध पर जाने से पहले इस मंदिर में पहुंचकर नाग देवता की पूजा-अर्चना करते थे।

कहा जाता है कि राजपरिवार की रानियां भी नियमित रूप से नाग देवता के मंदिर में विशेष पूजा करती थीं। यही वजह है कि नागफनी मंदिर आज भी स्थानीय लोगों के लिए आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। नागपंचमी के मौके पर यहां उमड़ने वाली भीड़ इस प्राचीन मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।

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