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NEET UG Re-Exam 2026 : NEET री-एग्जाम में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, 30 लाख में ‘डॉक्टर’ बनाने का सौदा, 24 गिरफ्तार

NEET UG Re-Exam 2026

बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन पर परीक्षा में धांधली कराने का आरोप है।

NEET UG Re-Exam 2026 : पटना/लखीसराय। NEET UG री-एग्जाम 2026 के दौरान बिहार में परीक्षा माफियाओं के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों से 7 सॉल्वर समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन पर परीक्षा में धांधली कराने का आरोप है।


प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने के लिए 30 लाख रुपये तक की डील की गई थी। इस खुलासे ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


गया मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया जा रहा मास्टरमाइंड- जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे रैकेट का कथित सरगना अर्पित राज है, जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि उसका नाम 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। उस समय केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ की थी। अब दोबारा उसका नाम सामने आने से परीक्षा माफिया के पुराने नेटवर्क के फिर सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।


एक शक ने खोल दी पूरी साजिश-

पुलिस के मुताबिक, मामले का खुलासा तब हुआ जब पीएमसीएच के छात्र मयंक कश्यप की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। वह कथित तौर पर बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर गया था। पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर तीन अलग-अलग केंद्रों पर छापेमारी की गई, जहां से सॉल्वर और कंपनी कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया।


मेडिकल और नर्सिंग छात्र भी शामिल-

जांच में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। बीएचयू की नर्सिंग छात्रा पूनम कुमारी पर एक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने का आरोप है। इसके अलावा रायबरेली एम्स के छात्र सौरभ झा, एनएमसीएच पटना के संजीत और उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज के छात्र अमन अग्रवाल का नाम भी इस गिरोह से जुड़ा पाया गया है।


कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका-

पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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