UP Ayushman Scheme: लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के अनुभव को स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी का हिस्सा बनाने की तैयारी है। योगी सरकार अब तकनीक की मदद से आयुष्मान कार्डधारक मरीजों और उनके परिजनों से अस्पताल में मिले इलाज और सुविधाओं का फीडबैक लेगी। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ‘साचीज’ की ओर से AI आधारित वाइस बॉट तैयार किया जा रहा है।

फोन पर मरीजों से होगी सीधे बातचीत

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के मुताबिक, एआई वाइस बॉट के जरिए इलाज करा चुके मरीजों से फोन पर बातचीत कर उनके अनुभव के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। मरीजों से यह पूछा जाएगा कि उन्हें आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं और इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा या नहीं। इसके अलावा अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, मेडिकल स्टाफ के व्यवहार और उपचार की प्रक्रिया को लेकर भी मरीजों की राय ली जाएगी। इससे स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली वास्तविक सुविधाओं और उनके अनुभव की जानकारी सीधे मिल सकेगी।

अनधिकृत पैसे की शिकायत भी सामने आएगी

इस फीडबैक व्यवस्था का एक अहम पहलू अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत उपचार के लिए लिए जाने वाले संभावित अनधिकृत शुल्क की जानकारी जुटाना भी है। मरीजों से पूछा जा सकेगा कि इलाज या योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं के लिए उनसे या उनके परिवार से अतिरिक्त रकम तो नहीं मांगी गई। अगर किसी लाभार्थी की ओर से अनधिकृत शुल्क, इलाज में लापरवाही, खराब व्यवहार या अन्य समस्या की जानकारी सामने आती है, तो संबंधित मामले को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जा सकेगा।

AI के जरिए बड़े स्तर पर होगा डेटा का विश्लेषण

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल मरीजों की प्रतिक्रियाएं दर्ज करना नहीं है। एआई तकनीक के जरिए बड़ी संख्या में मिलने वाले फीडबैक का विश्लेषण किया जाएगा और ऐसे मामलों को अलग किया जाएगा, जिनमें तत्काल या आगे कार्रवाई की आवश्यकता हो। इस व्यवस्था से अलग-अलग अस्पतालों से मिलने वाली शिकायतों और मरीजों की प्रतिक्रियाओं को व्यवस्थित तरीके से समझने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और ऑडिट को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

मैनुअल कॉल की जगह AI से बढ़ेगा दायरा

फिलहाल आयुष्मान योजना के कुछ लाभार्थियों से मैनुअल फोन कॉल के जरिए फीडबैक लिया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिक समय और मानव संसाधन की जरूरत होती है। एआई वाइस बॉट के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में मरीजों तक कम समय में पहुंचने की योजना है। इससे ज्यादा लाभार्थियों की राय एकत्र की जा सकेगी और स्वास्थ्य विभाग के पास मरीजों के अनुभव से जुड़ा व्यापक डेटा उपलब्ध होगा। यह डेटा अस्पतालों की कार्यप्रणाली और सेवाओं में मौजूद कमियों को पहचानने में उपयोगी हो सकता है।

मरीज की संतुष्टि को बनाया जाएगा अहम आधार

नई व्यवस्था के जरिए यह भी जानने की कोशिश की जाएगी कि इलाज के बाद मरीज अस्पताल की सेवाओं से कितना संतुष्ट है। उपचार की गुणवत्ता, सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार से जुड़े सवालों के जवाबों के आधार पर मरीजों के अनुभव को रिकॉर्ड किया जाएगा। साचीज के मुताबिक, आयुष्मान योजना का लक्ष्य केवल लाभार्थियों को इलाज उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना भी है। एआई आधारित फीडबैक सिस्टम इसी दिशा में मरीज की आवाज को स्वास्थ्य व्यवस्था तक सीधे पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

कमियों की पहचान कर सुधार पर रहेगा फोकस

सरकार का मानना है कि मरीजों से सीधे मिलने वाला फीडबैक अस्पतालों की निगरानी को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहने देगा। वास्तविक अनुभवों से सामने आने वाली समस्याओं के आधार पर अस्पतालों की सेवाओं में सुधार और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को बेहतर किया जा सकेगा।

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