5G Tower Network Coverage : नई दिल्ली। भारत में 5G नेटवर्क के विस्तार को गति देने के लिए सरकार ने मोबाइल बेस स्टेशन टावरों की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) पावर डेंसिटी सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले महीने से 5G बेस स्टेशन के लिए यह सीमा 5 वाट प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 10 वाट प्रति वर्ग मीटर की जा सकती है। सरकार के इस बदलाव से टेलीकॉम कंपनियों को कम टावरों के जरिए बड़े क्षेत्र में नेटवर्क कवरेज उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

5G विस्तार के लिए बढ़ाई गई सीमा

बताया जा रहा है कि टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय से EMF सीमा में बदलाव की मांग कर रही थीं। उनका तर्क था कि मौजूदा सीमा के कारण 5G नेटवर्क का विस्तार अधिक साइट्स और अतिरिक्त लागत के साथ करना पड़ रहा है। भारत में EMF की सीमा पहले 1 वाट प्रति वर्ग मीटर थी, जिसे पिछले साल बढ़ाकर 5 वाट प्रति वर्ग मीटर किया गया था। अब इसे 10 वाट प्रति वर्ग मीटर करने की तैयारी है।

नई सीमा इंटरनेशनल कमीशन ऑन नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन प्रोटेक्शन (ICNIRP) के सुझाए स्तर के अनुरूप बताई जा रही है। ICNIRP रेडियो-फ्रीक्वेंसी ऊर्जा के संपर्क से जुड़े मानकों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

टेलीकॉम कंपनियों को मिलेगा फायदा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद एक मोबाइल टावर से अधिक बड़े क्षेत्र में 5G सिग्नल पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनियों को नेटवर्क कवरेज बढ़ाने के लिए अतिरिक्त टावर साइट्स की जरूरत कम पड़ सकती है। परिणामस्वरूप नेटवर्क विस्तार की लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।

इस बदलाव का फायदा खास तौर पर उन कंपनियों को मिल सकता है जो अभी भी अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। वहीं, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियां अपने बड़े 5G नेटवर्क को मौजूदा साइट्स के जरिए अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकती हैं।

कई देशों के मानकों के करीब पहुंचेगा भारत

10 वाट प्रति वर्ग मीटर की सीमा लागू होने के बाद भारत का मानक दुनिया के कई देशों में अपनाए जा रहे स्तर के करीब पहुंच जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय संघ के कई देशों के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों में भी इसी तरह के स्तर अपनाए जाते हैं।

भारत ने वर्ष 2008 में ICNIRP के मानकों को अपनाया था, लेकिन बाद में देश में रेडिएशन संबंधी सीमाओं को और सख्त किया गया। 5G तकनीक के विस्तार के साथ टेलीकॉम इंडस्ट्री की ओर से मौजूदा नियमों में बदलाव की मांग लगातार उठती रही है।

यूजर्स को बेहतर कवरेज मिलने की उम्मीद

आम मोबाइल यूजर्स के लिए इस फैसले का संभावित फायदा बेहतर 5G कवरेज के रूप में सामने आ सकता है। ज्यादा पावर डेंसिटी की अनुमति से कुछ क्षेत्रों में कमजोर सिग्नल और नेटवर्क कवरेज की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि नई सीमा लागू होते ही हर इलाके में 5G की स्पीड या कवरेज तुरंत बेहतर हो जाएगी। इसका वास्तविक असर टेलीकॉम कंपनियों द्वारा मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल और नेटवर्क विस्तार की रणनीति पर निर्भर करेगा।

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