बेंगलुरु। दलीप ट्रॉफी 2026 में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपने खेल का एक नया पहलू दिखाकर सबको चौंका दिया। ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे 15 वर्षीय वैभव ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बल्लेबाजी से निराश करने के बाद गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने महज चार गेंदों के अंतर में दो विकेट चटकाकर अपनी टीम की जीत में अहम योगदान दिया।

एक ही ओवर में दो बड़े विकेट

नॉर्थ ईस्ट जोन की दूसरी पारी में गेंदबाजी का मौका मिलने पर वैभव ने बाएं हाथ की स्पिन का इस्तेमाल किया। उन्होंने एक ही ओवर में किशन लिंगदोह और इमलीवती लेमतूर को पवेलियन भेज दिया। दोनों विकेटों के बीच सिर्फ चार गेंदों का अंतर रहा। पूरे स्पेल में वैभव ने 3 ओवर में 11 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। उनके इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह गेंद से टीम के लिए उपयोगी योगदान दे सकते हैं।

बल्लेबाजी में सिर्फ 8 रन बना सके थे

गेंदबाजी से पहले वैभव सूर्यवंशी को लेकर निगाहें उनकी बल्लेबाजी पर थीं। हालांकि, दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके और सिर्फ 6 गेंदों पर 8 रन बनाकर आउट हो गए। उन्होंने अपनी छोटी पारी में दो चौके लगाए थे। इसके बाद गेंद हाथ में आते ही वैभव ने शानदार वापसी की और दो अहम विकेट निकालकर अपनी उपयोगिता साबित की।

ईस्ट जोन ने बनाया विशाल स्कोर

मुकाबले में ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 467 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से शाहबाज अहमद ने 167 रन और सुदीप कुमार घरामी ने 146 रन की बड़ी पारियां खेलीं। इन शतकीय पारियों ने ईस्ट जोन को मैच में पूरी तरह मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। इसके जवाब में नॉर्थ ईस्ट जोन की पहली पारी महज 111 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा। दूसरी पारी में भी टीम भारतीय घरेलू क्रिकेट की मजबूत टीम के गेंदबाजों का सामना नहीं कर सकी और 146 रन पर ऑलआउट हो गई।

ईस्ट जोन ने दर्ज की शानदार जीत

नॉर्थ ईस्ट जोन को दोनों पारियों में समेटते हुए ईस्ट जोन ने मुकाबला पारी और 210 रन से जीत लिया। इस जीत के साथ ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जगह बना ली। शाहबाज अहमद के शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन ने भी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

पहली ही दलीप ट्रॉफी में वैभव का अलग रंग

ईस्ट जोन के उपकप्तान के तौर पर दलीप ट्रॉफी में उतर रहे वैभव के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि बल्लेबाजी में जल्दी आउट होने के बाद उन्होंने गेंद से अपनी टीम को महत्वपूर्ण विकेट दिलाए। उनके 2/11 के आंकड़े प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके अब तक के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़े भी बने।

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