Rupee At Record Low: नई दिल्ली: भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 के करीब पहुंचकर अपने सबसे कमजोर स्तर पर आ गया है। वैश्विक बाजार में डॉलर की लगातार मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर भारी दबाव बना दिया है। कारोबार की शुरुआत में रुपया 95.80 पर खुला, लेकिन कुछ ही समय में इसमें और गिरावट दर्ज की गई।

निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़े

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के संकेतों के बाद निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते तनाव के बीच डॉलर को सबसे सुरक्षित मुद्रा माना जा रहा है। यही वजह है कि दुनिया भर में डॉलर की मांग तेजी से बढ़ रही है और अन्य मुद्राएं कमजोर हो रही हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी

हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाला है। निवेशक भारतीय संपत्तियां बेचकर रकम को डॉलर में बदल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपया कमजोर हो रहा है।

महंगे तेल ने बढ़ाई मुश्किल

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ रहा है। इसके कारण ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

आम लोगों की जेब पर असर

रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। मोबाइल, लैपटॉप, पेट्रोल, खाद्य तेल और अन्य आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा का खर्च भी बढ़ने की संभावना है।

कुछ सेक्टर को मिल सकता है फायदा

आईटी और फार्मा जैसी निर्यात आधारित कंपनियों को कमजोर रुपये से लाभ हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होगी।

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