Raipur City News : बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के लिए "JJ Act और POCSO Act" पर विशेष सेमिनार आयोजित, कई बिंदुओं पर की गई चर्चा
प्रशिक्षण का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम 2015, आदर्श अधिनियम 2016
By : Rohit Banchhor
Update: 2024-09-06 10:05 GMT
Raipur City News : रायपुर। पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ के निर्देशा पर 5 सितंबर 2024 को "Training for Child Welfare Police Officers On the JJ Act and POCSO Act" के संदर्भ में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन नया सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स रायपुर में किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति रही, जिनमें अमरेश मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर क्षेत्र, मिलना कुर्रे, पुलिस उपमहानिरीक्षक, पु.मु. नवा रायपुर, और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर संतोष कुमार सिंह शामिल थे।
Raipur City News : प्रशिक्षण का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम 2015, आदर्श अधिनियम 2016, और लैंगिक अपराधों से देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों को बाल कल्याण अधिकारियों तक पहुँचाना और उन्हें आवश्यक क्षमतावर्धन प्रदान करना था। इस कार्यक्रम में रायपुर, दुर्ग, और राजनांदगांव जिलों के 13 एसजेपीयू (स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट) और 194 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, महिला रक्षा टीम, और आईयूसीएडब्लू, रायपुर के स्टाफ ने भाग लिया।
Raipur City News : प्रशिक्षण के दौरान इन बिंदुओं पर की गई चर्चा-
जेजे नियम 8 के अनुसार कार्यवाही- जघन्य अपराधों में प्राथमिकी दर्ज की जाए, जबकि अन्य अपराधों में रोजनामचा/डीडी एंट्री कर बोर्ड को प्रस्तुत की जाए।
सामान्य और गंभीर अपराध में प्रारूप 2 भरकर बच्चों को परिजनों/अभिभावकों के सुपुर्द किया जाए।
रात्रिकालीन गिरफ्तारी से बचना- यदि रात्रि में गिरफ्तारी आवश्यक हो, तो बच्चे को संप्रेषण गृह में रखा जाए।
अज्ञात व्यक्ति के संदर्भ में प्राथमिकी- यदि बच्चा जांच के दौरान पकड़ा जाता है, तो अपराध का स्वरूप तैयार कर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करें।
उम्र संबंधित जाँच- किशोर न्याय अधिनियम धारा 94 के अनुसार कार्यवाही करें और उम्र संबंधी दस्तावेजों की अनुपस्थिति में बोर्ड/समिति के आदेशानुसार कार्रवाई करें।
भारतीय न्याय संहिता- सामान्य या गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हुए पोक्सो की धारा की समीक्षा और रोजनामचा/डीडी एंट्री कर बोर्ड को प्रस्तुत करें।
नशा सेवन मामलों में कार्रवाई- नशा सेवन करने वाली पीड़िता को सीएनसीपी की तरह देखे और नशा मुक्ति केंद्र में पुनर्वास सुनिश्चित करें।
यौन शोषण के मामलों में- सूचना मिलने पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध करें और पीड़िता के सर्वोत्तम हित में कार्यवाही करें।
देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे- इस पर चर्चा की गई कि कौन बच्चे देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले हो सकते हैं।
जिले में बाल संबंधित स्टेक होल्डर्स- जिले में बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, और विशेष किशोर पुलिस इकाई की जानकारी प्रदान की गई।
Raipur City News : इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में यूनिसेफ की चेतना देसाई, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, गीतांजोली, स्टेट कंसल्टेंट, यूनिसेफ, और कॉउंसिल टू सिक्योर जस्टिस की निमिषा श्रीवास्तव और उर्वशी तिलक ने प्रशिक्षकों के रूप में योगदान दिया। यह सेमिनार बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा और इसके माध्यम से बाल संरक्षण के क्षेत्र में नई दिशा और जानकारी प्रदान की गई।