Bihar News : बिहार में बनेगी महिला यूनिवर्सिटी, छात्राओं से लेकर कुलपति तक होंगी महिलाएं; CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य में एक ऐसी महिला यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी, जहां छात्राओं के साथ-साथ कुलपति, शिक्षक और अन्य स्टाफ भी महिलाएं होंगी।
पटना। रक्षाबंधन के अवसर पर बिहार सरकार ने महिला शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य में एक ऐसी महिला यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी, जहां छात्राओं के साथ-साथ कुलपति, शिक्षक और अन्य स्टाफ भी महिलाएं होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में केवल छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा और प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था में भी महिलाओं की ही भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
‘समृद्ध महिला समृद्ध बिहार’ अभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के बापू सभागार में ‘समृद्ध महिला समृद्ध बिहार अभियान’ की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने महिला रोजगार योजना के तहत 5 लाख लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में करीब ₹600 करोड़ की राशि DBT के माध्यम से ट्रांसफर की। सरकार का कहना है कि आर्थिक सहायता का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना तथा उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
2030 तक जीविका दीदियों पर खर्च होंगे 20 हजार करोड़
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों के लिए भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक उनके विकास और सशक्तिकरण के लिए सरकार करीब 20 हजार करोड़ खर्च करेगी। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार, प्रशिक्षण और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, महिला आर्थिक रूप से मजबूत होगी तो परिवार और राज्य दोनों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
छात्राओं के लिए खास होगी महिला यूनिवर्सिटी
प्रस्तावित महिला विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां सिर्फ छात्राओं को दाखिला मिलेगा। विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं के अलावा प्रशासनिक पदों पर भी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुलपति का पद भी महिला के पास होगा। इस योजना को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं के लिए विशेष अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना बताया गया है, जहां वे उच्च शिक्षा के साथ नेतृत्व की भूमिका के लिए भी तैयार हो सकें।
एक दिन पहले शुरू हुईं तीन महिला-केंद्रित योजनाएं
महिलाओं और बच्चियों के लिए सरकार ने इससे एक दिन पहले भी तीन नई योजनाओं की शुरुआत की थी। इनमें बेटी स्टार्टअप चैलेंज, बालिका पीएचडी फेलोशिप और स्कूल-कॉलेजों के आसपास ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती शामिल है। मुख्यमंत्री ने ‘पुलिस दीदी’ पहल के तहत 4,700 दोपहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसका उद्देश्य छात्राओं और युवतियों के बीच सुरक्षा की भावना मजबूत करना तथा जरूरत पड़ने पर पुलिस की पहुंच आसान बनाना है।
महिला उद्यमियों को 2 लाख तक की मदद
बेटी स्टार्टअप चैलेंज के तहत महिला उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने या उसका विस्तार करने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को 50 हजार से 2 लाख तक की वित्तीय मदद दी जाएगी। सरकार के अनुसार, शुरुआती चरण में करीब 2,100 महिला उद्यमियों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए नई सोच, नवाचार और महिला नेतृत्व वाले कारोबार को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
PhD करने वाली छात्राओं को हर महीने 10 हजार
उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए बालिका पीएचडी फेलोशिप योजना भी शुरू की गई है। इसके तहत PhD करने वाली छात्राओं को चार साल तक हर महीने 10 हजार की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इस योजना से करीब 1,000 छात्राओं को लाभ मिलने की बात कही गई है। सरकार का दावा है कि फेलोशिप से आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा रुकने की संभावना कम होगी और ज्यादा छात्राएं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगी।
महिला रोजगार और शिक्षा पर सरकार का फोकस
रक्षाबंधन पर किए गए इन ऐलानों से साफ है कि बिहार सरकार महिला सशक्तिकरण को शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और उद्यमिता से जोड़ने की कोशिश कर रही है। एक ओर महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने की योजना है, तो दूसरी ओर उच्च शिक्षा और कारोबार के लिए नई व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।