नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता मजबूत होने जा रही है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में बना पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मंगरोल’ 12 अक्टूबर को नौसेना में शामिल होगा। यह इस श्रेणी का तीसरा स्वदेशी पोत है। इसे खास तौर पर तटीय और उथले पानी में पनडुब्बियों से पैदा होने वाले खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है।

आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस

मंगरोल में अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और मारीच टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम लगाया गया है। तीन डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणाली से लैस यह पोत उथले पानी में तेजी से दिशा बदल सकता है।

तटीय सुरक्षा में मिलेगी मजबूती

यह युद्धपोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलिकॉप्टरों और दूसरे युद्धपोतों के साथ मिलकर काम करेगा। इसकी मदद से बंदरगाहों, तटीय इलाकों और नौसैनिक ठिकानों के आसपास पानी के भीतर मौजूद खतरों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। यह कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और माइन वॉरफेयर से जुड़े कार्यों में भी सक्षम है।

80% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री

मंगरोल में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसका निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत किया गया है। यह पोत देश में आधुनिक युद्धपोतों के डिजाइन, निर्माण और हथियार प्रणालियों के विकास की क्षमता को दर्शाता है।

वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन करेंगे अध्यक्षता

युद्धपोत को नौसेना में शामिल करने का समारोह 12 अक्टूबर को आयोजित होगा। इसकी अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन करेंगे। मंगरोल का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर के नाम पर रखा गया है। यह पूर्व आईएनएस मंगरोल (एम-85) की विरासत को आगे बढ़ाएगा, जिसने 7 अप्रैल 2004 तक नौसेना में सेवाएं दी थीं।

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