नई दिल्ली। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच दुनिया की नजर भारत और चीन के रिश्तों पर है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच शनिवार शाम को द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है।

यह मुलाकात इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण दौर से गुजरे हैं। अब सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच दोनों नेताओं की बातचीत पर खास नजर है। शी जिनपिंग का यह 2019 के बाद पहला भारत दौरा भी है।



भारत इस बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के नेता वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद, व्यापार, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

मोदी-जिनपिंग की मुलाकात क्यों अहम है?

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद सबसे बड़ी चुनौती रहा है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव बढ़ गया था।

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत और सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 2024 में सैनिकों के पीछे हटने के बाद रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में कुछ कदम उठे हैं। ऐसे माहौल में मोदी और जिनपिंग की आमने-सामने बातचीत को आगे की कूटनीतिक दिशा के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

दोनों देशों के बीच व्यापार, बाजार तक पहुंच, निवेश, वीजा और सीमा से जुड़े मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए बैठक में केवल रिश्तों की गर्माहट ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक मुद्दों पर भी चर्चा की उम्मीद है।

क्या दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आएगा?

मोदी-जिनपिंग बैठक को लेकर उम्मीदें जरूर हैं, लेकिन इसे भारत-चीन संबंधों में तत्काल बड़े बदलाव के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। सीमा से जुड़े सवाल और दूसरे लंबित मुद्दे अभी मौजूद हैं। फिलहाल दोनों देशों की कोशिश संवाद बनाए रखने और मतभेदों को संभालते हुए संबंधों को स्थिर करने की दिखाई दे रही है।

BRICS में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

भारत की अध्यक्षता में इस साल BRICS का फोकस लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर रखा गया है। भारत के मुताबिक, उसकी अध्यक्षता के दौरान BRICS सहयोग को राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा तथा तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों और बदलते वैश्विक समीकरणों पर भी नेताओं के बीच विचार-विमर्श होगा।

पुतिन से मोदी की मुलाकात भी रही अहम

शी जिनपिंग के भारत पहुंचने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। BRICS के मंच पर रूस और चीन के साथ भारत की सक्रिय कूटनीति ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, सुरक्षा और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?

BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद इसमें कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं और संगठन का वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है। 2026 का शिखर सम्मेलन भारत को इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का अवसर देता है।

इसलिए दिल्ली में हो रही बैठकों का असर केवल BRICS तक सीमित नहीं है। खासकर मोदी-जिनपिंग बातचीत को भारत-चीन संबंधों के अगले चरण के संकेत के रूप में देखा जाएगा।

अब नजर मोदी-जिनपिंग बातचीत के नतीजों पर

BRICS Summit 2026 में कई बड़े मुद्दे एजेंडे पर हैं, लेकिन भारत और चीन के नेताओं की मुलाकात सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। दोनों देशों के रिश्तों में पिछले कुछ समय में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन आगे का रास्ता अभी लंबा है।

ऐसे में इस बैठक से यह समझने में मदद मिल सकती है कि नई दिल्ली और बीजिंग अपने मतभेदों को किस तरह संभालना चाहते हैं और द्विपक्षीय संबंधों को किस दिशा में आगे ले जाने की तैयारी है।

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