Ola-Uber और डिलीवरी वर्कर्स के लिए बदल सकते हैं नियम, सोशल सिक्योरिटी फंड से मिलेगा लाभ
सरकार एग्रीगेटर कंपनियों से लिए जाने वाले सामाजिक सुरक्षा अंशदान के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इसका सीधा फायदा कैब ड्राइवर, डिलीवरी बॉय, बाइक राइडर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिल सकता है।
नई दिल्ली। देश में गिग वर्कर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है। सरकार एग्रीगेटर कंपनियों से लिए जाने वाले सामाजिक सुरक्षा अंशदान के नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। इसका सीधा फायदा कैब ड्राइवर, डिलीवरी बॉय, बाइक राइडर और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए बनाए गए सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना अनिवार्य है। अब सरकार इस योगदान की गणना के तरीके को तय करने पर मंथन कर रही है।
अंशदान तय करने के लिए दो विकल्पों पर चर्चा
श्रम और रोजगार मंत्रालय एग्रीगेटर कंपनियों के योगदान के लिए दो संभावित मॉडल पर विचार कर रहा है। पहला विकल्प कंपनियों के सालाना कारोबार (टर्नओवर) के आधार पर अंशदान तय करना है, जबकि दूसरा विकल्प कामगारों को किए जाने वाले भुगतान या प्रति लेनदेन के आधार पर योगदान लेना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भुगतान आधारित व्यवस्था का असर उन कंपनियों पर ज्यादा पड़ सकता है, जहां रोजाना लेनदेन की संख्या अधिक होती है, जैसे कैब, ऑटो और बाइक राइड सेवाएं।
सामाजिक सुरक्षा कानून में क्या है प्रावधान?
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होता है। नियमों के अनुसार, कोई गिग वर्कर यदि किसी एक एग्रीगेटर कंपनी के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन काम करता है या अलग-अलग प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ कुल 120 दिन काम करता है, तो वह इस योजना के लाभ के लिए पात्र हो सकता है।
कारोबार के 1-2% या भुगतान के 5% तक योगदान का प्रस्ताव
मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत तक सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान देना होगा।हालांकि, यह योगदान गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को किए जाने वाले कुल भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। अब सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि योगदान की गणना सीधे कामगारों को किए गए भुगतान के आधार पर की जाए या कंपनी के कुल कारोबार के आधार पर।
लाखों वर्कर्स को मिल सकती है राहत
देश में बड़ी संख्या में लोग कैब एग्रीगेटर, फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। इन कर्मचारियों को अभी पारंपरिक रोजगार की तरह कई सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमा, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ गिग वर्कर्स तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े इन कामगारों को आर्थिक सुरक्षा देना है, वहीं उद्योग जगत भी ऐसे नियमों के प्रभाव और लागत को लेकर अपनी राय दे रहा है।