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भोपाल में महिला कांग्रेस का नारी न्याय आंदोलन, राजभवन जा रही महिलाओं से पुलिस की झड़प, चक्कर खाकर गिरी विभा पटेल

विभा पटेल ने कहा, 'महिला अत्याचार में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर है। यहां हर दिन रेप की 17 घटनाएं सामने आती हैं।

भोपाल में महिला कांग्रेस का नारी न्याय आंदोलन, राजभवन जा रही महिलाओं से पुलिस की झड़प, चक्कर खाकर गिरी विभा पटेल
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भोपाल। महिला कांग्रेस पूरे देश भर में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए नारी न्याय आंदोलन चला रही है। आज से मध्य प्रदेश में भी नारी न्याय आंदोलन के दूसरे चरण का शुभारंभ हुआ है। राजधानी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल के नेतृत्व में प्रदेश भर से भोपाल पहुंची महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया उसके बाद सभी महिलाएं राज भवन की और रवाना हो गई। इस दौरान पुलिस और महिला कार्यक्रर्ताओं के बीच झड़प हों गई।

दरअसल महिला कांग्रेस की पदाधिकारी ज्ञापन देने के लिए राजभवन की ओर जाना चाहती थी जिन्हें पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे से निकलते ही बेरिकेडिंग कर रोका लिया था। महिलाओं को रोके जाने से वह सभी आक्रोशित हो गई। तभी नारेबाज़ी करते हुए महिला कांग्रेस अध्यक्ष विभा पटेल के साथ कुछ कार्यकर्ता बेरिकेड्स तोड़कर राज भवन की और रवाना हुई। बाकी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक लिया। प्रदर्शन के दौरान गर्मी की वजह से विभा पटेल को चक्कर आ गया। वे नीचे बैठ गईं। साथी कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला।





पुलिस ने कांग्रेसियों के प्रोटेस्ट को गैरकानूनी घोषित किया है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल ने कहा कि हम लोग महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार ,अपराध को लेकर न्याय की मांग करने सड़कों पर उतरे थे। लेकिन हमारे साथ अभद्रता की गई। पुलिस ने दुर्व्यवहार किया, महिलाओं को चोट भी आईं, कपड़े फट गए। महिलाओं के प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने पुरुष फोर्स को लगाया। महिलाओं के हक की आवाज हम लोग लगातार उठाते रहेंगे।




उससे पहले शहर के रोशनपुरा चौराहे पर प्रदेश भर की महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विभा पटेल ने कहा, 'महिला अत्याचार में मध्यप्रदेश पहले नंबर पर है। यहां हर दिन रेप की 17 घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए बने कानून को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। अपराधियों में खौफ होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता। पीड़ित को भटकना पड़ता है। आर्थिक, सामाजिक और यौन उत्पीड़न, महिला आरक्षण, जातिगत जनगणना, बेलगाम महंगाई, चौपट स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे कई मुद्दे हैं। हम यह भी चाहते हैं कि लाड़ली बहनों की लिस्ट से काटे गए नाम वापस जोड़े जाएं।'

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