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Vivo-Dixon: भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा, डिक्सन-वीवो की पार्टनरशिप को सरकार की मंजूरी

Vivo-Dixon: भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा, डिक्सन-वीवो की पार्टनरशिप को सरकार की मंजूरी
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Vivo-Dixon: नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वीवो मोबाइल इंडिया की साझेदारी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद दोनों कंपनियां मिलकर भारत में स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण कर सकेंगी। नई कंपनी में डिक्सन की 51% हिस्सेदारी और वीवो की 49% हिस्सेदारी होगी। अधिक हिस्सेदारी होने के कारण यह कंपनी डिक्सन की सहायक कंपनी के रूप में काम करेगी।

मंजूरी क्यों थी जरूरी?

वीवो एक चीनी कंपनी है। भारत में 2020 से लागू नियमों के अनुसार, चीन जैसे पड़ोसी देशों से जुड़े निवेश के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। सरकार ने 8 जुलाई को इस परियोजना को मंजूरी देकर इसका रास्ता साफ कर दिया।

क्या होगा नई कंपनी का काम?

नई कंपनी मुख्य रूप से वीवो के लिए स्मार्टफोन बनाएगी। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनियों के लिए भी मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तैयार करेगी। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और डिक्सन का कारोबार भी मजबूत होगा।

एक साल में पूरा होगा समझौता

डिक्सन और वीवो ने इस साझेदारी की घोषणा दिसंबर 2024 में की थी। अब सरकारी मंजूरी मिलने के बाद बाकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। कंपनी का लक्ष्य अगले एक साल के भीतर इस संयुक्त उद्यम को पूरी तरह शुरू करना है। इससे भारत में स्थानीय स्तर पर स्मार्टफोन निर्माण और रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद है।


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