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UP में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर योगी सरकार का बड़ा कदम, हर जिले में खुलेंगे 3 फिटनेस जांच सेंटर

UP में स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर योगी सरकार का बड़ा कदम, हर जिले में खुलेंगे 3 फिटनेस जांच सेंटर
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी की है। राज्य के सभी जिलों में जल्द ही तीन-तीन वाहन फिटनेस जांच सेंटर खोले जाएंगे। सरकार का उद्देश्य स्कूली बसों और अन्य विद्यालयी वाहनों की फिटनेस जांच को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बुधवार को विधान परिषद में इसकी जानकारी दी।

हर जिले में बनेंगे तीन फिटनेस जांच केंद्र

परिवहन राज्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के हर जिले में तीन वाहन फिटनेस जांच सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे स्कूली वाहनों की तकनीकी जांच और फिटनेस प्रमाणन की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सड़क पर पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में ही संचालित हों।

स्कूली वाहनों को फिटनेस में नहीं मिलेगी छूट

विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्य आशुतोष सिन्हा ने विद्यालयी बसों और अन्य स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल बसें सामान्य यात्री बसों की तुलना में कम समय और सीमित दिनों तक संचालित होती हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से स्कूली वाहनों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने पर विचार करने की मांग की।

जवाब में परिवहन राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच में किसी तरह की छूट देना संभव नहीं है। उन्होंने इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

बसों की उम्र बढ़ाने से सरकार का इनकार

सरकार के मौजूदा नियमों के मुताबिक, शिक्षा संस्थानों की बसों की अधिकतम आयु 15 वर्ष, जबकि निजी स्कूल बसों और विद्यालयी वैन की अधिकतम आयु 10 वर्ष निर्धारित है। सरकार ने फिलहाल इन निर्धारित सीमाओं में बदलाव से इनकार किया है।

दयाशंकर सिंह के मुताबिक, वाहन की उम्र सीमा तय करते समय विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ उसकी भौतिक, यांत्रिक और तकनीकी स्थिति तथा सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। उनका कहना है कि केवल संचालन कम होने के आधार पर वाहन की आयु सीमा बढ़ाना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

फिटनेस पास वाहन को उम्र के आधार पर हटाने पर उठे सवाल

हालांकि, विधान परिषद में इस मुद्दे पर कई सदस्यों ने अलग राय भी रखी। भाजपा के उमेश द्विवेदी, हरी सिंह ढिल्लो और देवेंद्र प्रताप सिंह समेत शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने आशुतोष सिन्हा की मांग का समर्थन किया।

सदस्यों का तर्क था कि यदि कोई स्कूली वाहन नियमित फिटनेस परीक्षण में सफल हो रहा है और उसकी तकनीकी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है, तो केवल वाहन की निर्धारित उम्र के आधार पर उसे संचालन से बाहर करना दोबारा विचार करने योग्य विषय है।

बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि स्कूली वाहनों के मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। नए फिटनेस जांच केंद्र खुलने से वाहनों की जांच व्यवस्था को मजबूत करने और फिटनेस से जुड़े नियमों के बेहतर पालन की उम्मीद है। सरकार की इस पहल से प्रदेश में स्कूल बसों और वैन की निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में मदद मिल सकती है।


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