UP News : राप्ती नदी के किनारे बनेगा रिवर फ्रंट, 1303 करोड़ से बदलेगी गोरखपुर की तस्वीर, पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

गोरखपुर। गोरखपुर में राप्ती नदी के किनारे एक महत्वाकांक्षी रिवर फ्रंट विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। राजघाट से डोमिनगढ़ तक करीब 3.5 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करने की योजना है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने इस परियोजना की लगभग ₹1303 करोड़ की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। तकनीकी परीक्षण और जरूरी सुझावों के बाद प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
तीन चरणों में तैयार होगा राप्ती रिवर फ्रंट
प्रस्तावित रिवर फ्रंट को राप्ती नदी के तट से हार्बर्ट बांध फोरलेन सड़क तक करीब 150 मीटर चौड़े क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में अर्बन हाट और ईको पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां लोगों को मनोरंजन के साथ प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
दूसरे चरण में फोरलेन सड़क से सार्वजनिक प्रवेश मार्ग तैयार किए जाएंगे। इस हिस्से में योगा सेंटर समेत अन्य जनसुविधाओं को विकसित करने की योजना है। तीसरे चरण में अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाए जाएंगे, जहां बड़े सम्मेलन, प्रदर्शनियां और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।
बोटिंग से लेकर ग्रीन बेल्ट तक की सुविधाएं
राप्ती रिवर फ्रंट को सिर्फ पार्क और घूमने की जगह तक सीमित नहीं रखा जाएगा। परियोजना के तहत नदी किनारे सड़क, नालियां, लैंडस्केपिंग, पार्क, कियोस्क और खुले सार्वजनिक स्थल विकसित किए जाएंगे। नदी के अलग-अलग हिस्सों में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्लेटफॉर्म और जेटी भी बनाए जाने की योजना है।
हार्बर्ट बांध की ओर के हिस्से को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे रिवर फ्रंट क्षेत्र को हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के साथ नया स्वरूप मिलने की उम्मीद है।
बाढ़ के दौरान सुरक्षा पर भी होगा फोकस
राप्ती नदी से जुड़ी इस परियोजना में बाढ़ और जलस्तर को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जा रही है। GDA और सिंचाई विभाग संयुक्त रूप से तकनीकी पहलुओं का परीक्षण करेंगे। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि बाढ़ के दौरान रिवर फ्रंट की संरचनाओं को सुरक्षित कैसे रखा जाए और नदी का जलस्तर कम होने पर विकास कार्यों को किस तरह संचालित किया जाए।
तकनीकी परीक्षण के दौरान यदि किसी बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है तो DPR में आवश्यक संशोधन भी किए जा सकते हैं। इसके बाद परियोजना को शासन के समक्ष स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
यमुना रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकास की तैयारी
GDA के उपाध्यक्ष अभिनव गोयल के मुताबिक, राप्ती रिवर फ्रंट गोरखपुर के पर्यटन को नई दिशा देने वाला प्रोजेक्ट साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि DPR को लेकर सिंचाई विभाग के साथ बैठक कर तकनीकी निर्णय लिए जाएंगे। धनराशि की स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। इसे यमुना रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित करने की योजना है, जहां कन्वेंशन सेंटर, ओपन स्पेस और पर्यटकों को आकर्षित करने वाली कई सुविधाएं होंगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के सामने फूड स्ट्रीट हब भी तैयार
शहर में पर्यटन और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के साथ ही गोरखपुर विश्वविद्यालय के सामने आधुनिक फूड स्ट्रीट हब का निर्माण भी शुरू हो गया है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत पार्क के सामने स्मार्ट रोड पर करीब ₹3.39 करोड़ की लागत से यह हब तैयार किया जा रहा है।
करीब 150 मीटर लंबे इस कॉरिडोर को हेरिटेज थीम पर विकसित किया जा रहा है। यहां 35 हेरिटेज शैली के वेंडर कार्ट लगाए जाएंगे। इसके अलावा आठ आकर्षक केनोपी बनाई जाएंगी, जहां बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था होगी। स्मार्ट रोड के पाथवे के साथ हरियाली और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य भी किए जाएंगे।
पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान की उम्मीद
राप्ती रिवर फ्रंट और फूड स्ट्रीट हब जैसी परियोजनाओं के जरिए गोरखपुर में पर्यटन, मनोरंजन और शहरी सुविधाओं को एक साथ बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। राप्ती नदी के किनारे प्रस्तावित आधुनिक विकास से शहरवासियों को नए सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ गोरखपुर को पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


