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Ayodhya Jhulanotsav 2026: अयोध्या में 498 साल पुरानी झूलनोत्सव परंपरा में बदलाव, स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला, जानिए कब से होगा शुरू

भव्य राम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद यह आयोजन पहले की तुलना में अधिक दिव्य और व्यापक स्वरूप में होने जा रहा है।

Ayodhya Jhulanotsav 2026: अयोध्या में 498 साल पुरानी झूलनोत्सव परंपरा में बदलाव, स्वर्ण झूले पर विराजेंगे रामलला, जानिए कब से होगा शुरू
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Ayodhya Jhulanotsav 2026: अयोध्या। अयोध्या में इस वर्ष सावन का झूलनोत्सव बेहद खास होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के झूलनोत्सव की परंपरा करीब 498 साल बाद नए स्वरूप में दिखाई देगी। इस बार उत्सव की शुरुआत सावन शुक्ल पंचमी के बजाय सावन शुक्ल तृतीया से किए जाने की तैयारी है। भव्य राम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद यह आयोजन पहले की तुलना में अधिक दिव्य और व्यापक स्वरूप में होने जा रहा है।

स्वर्ण झूले पर होंगे रामलला के दर्शन

इस बार झूलनोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रामलला का विशेष स्वर्ण झूला होगा। भगवान राम के बाल स्वरूप को गर्भगृह में तैयार किए गए स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष दर्शन व्यवस्था की जा रही है, जिसके तहत भक्त निर्धारित दूरी से रामलला के दिव्य झूला दर्शन कर सकेंगे। स्वर्ण झूले पर विराजमान रामलला का यह स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव माना जा रहा है।

15 अगस्त से शुरू होगा झूलनोत्सव

अयोध्या में पारंपरिक झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त से होगी और यह 26 अगस्त तक चलेगा। उत्सव का शुभारंभ मणि पर्वत से किया जाएगा। सावन के दौरान मणि पर्वत पर झूलनोत्सव की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यहां भगवान के विग्रहों को आकर्षक ढंग से सजाए गए झूलों पर विराजमान कराकर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाते हैं।

498 साल बाद परंपरा में क्यों हुआ बदलाव?

अयोध्या में सावन के दौरान भगवान को झूले पर विराजमान कराने की परंपरा सदियों पुरानी है। रामलला के टेंट में विराजमान रहने के दौर में भी सीमित स्तर पर झूलनोत्सव की रस्म निभाई जाती थी। अब भव्य मंदिर निर्माण के बाद इस परंपरा को नए स्वरूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष झूलनोत्सव की शुरुआत की तिथि में बदलाव किया गया है। मंदिर से जुड़े पारंपरिक उत्सवों को भव्य स्वरूप देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भक्ति के साथ दिखेगा वात्सल्य भाव

झूलनोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भगवान के बाल स्वरूप के प्रति भक्तों के वात्सल्य भाव को भी दर्शाता है। भक्त रामलला को बालक के रूप में देखते हुए उन्हें उसी तरह झूला झुलाते हैं, जैसे माता-पिता अपने बच्चों को सावन में झूला झुलाते हैं। इस दौरान मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती, पूजा और भोग के साथ भक्तिमय वातावरण बनता है।

मुख्य मंदिर के साथ अन्य मंदिरों में भी आयोजन

इस बार झूलनोत्सव का आयोजन केवल मुख्य राम मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा। मंदिर परिसर के पूरक मंदिरों में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूजा-अर्चना, आरती, भोग और अन्य अनुष्ठानों के जरिए पूरे मंदिर परिसर को सावन की भक्ति और उत्सव के रंग में सजाने की तैयारी है। ऐसे में अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष का झूलनोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है।


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