Breaking News
:

Supreme Court Decision: फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट, जानें किस मामले में कोर्ट ने की टिप्पणी

Supreme Court Decision

Supreme Court Decision: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है।

 Supreme Court Decision: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) में निहित आवागमन की स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(c) और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है।


Supreme Court Decision: अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और निर्धारित फुटपाथ उपलब्ध कराना राज्य और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है तथा इन अधिकारों को मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि सड़कें बनाई जाती हैं तो यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि वहां पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और सुचारु फुटपाथ मौजूद हों। अदालत ने कहा, शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगरपालिकाएं और पंचायतें फुटपाथों के निर्माण, रखरखाव और संरक्षण के लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि पैदल चलना मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


Supreme Court Decision: क्या है मामला


सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान की गई। मामला एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत से जुड़ा था। बच्चे के पिता उसे स्कूल ले जा रहे थे, तभी पीछे से आए एक टैंकर ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में बच्चे की गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई। मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने 30 मई 2016 को पीड़ित परिवार को 7.82 लाख रुपये मुआवजा और छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था। बाद में बीमा कंपनी की अपील पर हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि घटाकर 4.70 लाख रुपये कर दी।


Supreme Court Decision: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाईकोर्ट द्वारा मुआवजे में कटौती करना उचित नहीं था। अदालत ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11.44 लाख रुपये कर दी और बीमा कंपनी को दो माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया। अपने फैसले में अदालत ने माना कि जिस सड़क पर दुर्घटना हुई, वहां न तो फुटपाथ था और न ही पैदल यात्रियों के लिए कोई सुरक्षित क्रॉसिंग। अदालत ने यह भी कहा कि सड़कों के उपयोग से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों को नए सिरे से परिभाषित किए बिना ऐसी दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल होगा।

Popular post

Live News

Latest post

You may also like

Subscribe Here

Enter your email address to subscribe to this website and receive notifications of new posts by email.

Join Us