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Saif Ali Khan : पटौदी परिवार को हाई कोर्ट का झटका, पुश्तैनी संपत्ति विवाद में 25 साल पुराना फैसला पलटा, दोबारा सुनवाई का आदेश

यह विवाद मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत संपत्ति के बंटवारे से संबंधित है, जिसका असर सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर, सबा सुल्तान, और सोहा अली खान सहित पटौदी परिवार के अन्य सदस्यों पर पड़ सकता है।

Saif Ali Khan : पटौदी परिवार को हाई कोर्ट का झटका, पुश्तैनी संपत्ति विवाद में 25 साल पुराना फैसला पलटा, दोबारा सुनवाई का आदेश
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Saif Ali Khan : भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मुहम्मद हमीदुल्लाह खान की पुश्तैनी संपत्ति से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद में पटौदी परिवार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने वर्ष 2000 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है। यह विवाद मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत संपत्ति के बंटवारे से संबंधित है, जिसका असर सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर, सबा सुल्तान, और सोहा अली खान सहित पटौदी परिवार के अन्य सदस्यों पर पड़ सकता है।

ट्रायल कोर्ट का फैसला त्रुटिपूर्ण-

हाई कोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने अपने फैसले में कहा कि भोपाल के जिला न्यायालय ने वर्ष 2000 में संपत्ति बंटवारे की याचिका को खारिज करते समय कानूनी सिद्धांतों और मुस्लिम पर्सनल लॉ का सही ढंग से पालन नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले (तलत फातिमा हसन मामले) पर आधारित निर्णय लिया, जो अब लागू नहीं है। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को एक वर्ष के भीतर मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बंटवारे पर फैसला देने का निर्देश दिया है।

विवाद का इतिहास-

यह मामला भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मुहम्मद हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़ा है, जिनका निधन 1960 में हुआ था। उनके निधन के बाद उनकी दूसरी बेटी साजिदा सुल्तान को संपत्ति की उत्तराधिकारी माना गया था, जो सैफ अली खान की दादी थीं। हालांकि, नवाब की अन्य बेटियों और उत्तराधिकारियों, जैसे सुरैया रशीद और राबिया सुल्तान, ने दावा किया कि संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होना चाहिए। वर्ष 1999 में दायर दो सिविल मुकदमों में संपत्ति के बंटवारे, कब्जे और हिसाब-किताब की मांग की गई थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 2000 में खारिज कर दिया था।

पटौदी परिवार की संपत्ति पर खतरा-

पटौदी परिवार की भोपाल और रायसेन में हजारों एकड़ जमीन और ऐतिहासिक संपत्तियां, जैसे फ्लैग स्टाफ हाउस, नूर-उस-सबाह पैलेस, दर-उस-सलाम, अहमदाबाद पैलेस, और कोहेफिजा प्रॉपर्टी, इस विवाद का हिस्सा हैं। इन संपत्तियों का मूल्य करीब 15,000 करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने इन संपत्तियों को 2014 में ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) घोषित किया था, क्योंकि नवाब की बड़ी बेटी अबीदा सुल्तान 1950 में पाकिस्तान चली गई थीं। सैफ अली खान और शर्मिला टैगोर ने 2015 में इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 13 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और अपीलीय प्राधिकरण में अपील करने का निर्देश दिया।


नया मोड़ और संभावित प्रभाव-

हाई कोर्ट के ताजा फैसले ने संपत्ति बंटवारे के मामले को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नवाब की निजी संपत्तियां रियासत के सिंहासन से स्वतंत्र हैं और इनका बंटवारा उत्तराधिकार के निजी कानून के तहत होना चाहिए। इस फैसले से सैफ अली खान और उनके परिवार की संपत्ति पर दावा कमजोर हो सकता है, क्योंकि अन्य वारिसों के दावों को भी मान्यता मिल सकती है। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा ‘शत्रु संपत्ति’ के तहत संपत्तियों पर कब्जे की प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे भोपाल और रायसेन में रहने वाले करीब 1.5 लाख निवासियों पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है।


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