PM Modi on West Asia crisis: 'युद्ध के प्रभाव लंबे वक्त तक रहेंगे' स्वदेशी जहाज तैयार करने पर खर्च होंगे 70,000 करोड़ रुपये, राज्यसभा में बोले पीएम मोदी
PM Modi on West Asia crisis

PM Modi on West Asia crisis: नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट पर विस्तार से चर्चा करते हुए भारत की रणनीति और तैयारियों का खाका पेश किया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों और उनमें मौजूद भारतीय क्रू मेंबर्स को लेकर चिंता जताई और कहा कि उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की ओर धकेल दिया है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा भी बेहद अहम है। भारत लगातार ईरान, इज़राइल, अमेरिका और अन्य देशों के संपर्क में है, ताकि संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव कम किया जा सके।
मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य युद्ध को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य हो सके। उन्होंने नागरिकों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा भी की। ऊर्जा सुरक्षा पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पिछले 11 वर्षों में 5.3 मिलियन मीट्रिक टन रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार किए गए हैं और आपूर्ति स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक विस्तारित किया गया है।
आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है, जो संकट के समय जोखिम पैदा करता है। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये की लागत से ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण अभियान शुरू किया है, जिसके तहत हजारों स्वदेशी जहाज बनाए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाएं और आवश्यक वस्तुओं की लगातार निगरानी करें। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और मौजूदा संकट से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।


